CardioHealth – रोजमर्रा के काम भी दिल और किडनी के लिए फायदेमंद
CardioHealth – व्यस्त जीवनशैली में जिम जाना या नियमित व्यायाम करना हर किसी के लिए संभव नहीं हो पाता। दफ्तर की जिम्मेदारियां, घर का काम और समय की कमी के बीच लोग अक्सर अपनी सेहत को प्राथमिकता नहीं दे पाते। ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या बिना जिम जाए भी स्वस्थ रहा जा सकता है? विशेषज्ञों का कहना है कि इसका जवाब हां है, बशर्ते हम अपने दैनिक जीवन में हल्की शारीरिक गतिविधियों को शामिल करें।

बदलती जीवनशैली और बढ़ते जोखिम
आधुनिक जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि लगातार घट रही है। लंबे समय तक बैठकर काम करने की आदत ने डायबिटीज, हृदय रोग और किडनी संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ा दिया है। कम उम्र में मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर के मामले बढ़ रहे हैं, जो आगे चलकर दिल और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, शरीर को सक्रिय रखना इन जोखिमों को कम करने का पहला कदम है।
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की सिफारिश
अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति जिम या तेज व्यायाम के लिए समय नहीं निकाल पाता, तो भी वह सामान्य घरेलू कार्यों के जरिए अपनी सेहत में सुधार ला सकता है। अध्ययन के मुताबिक, कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम से जूझ रहे लोगों में हल्की शारीरिक गतिविधि भी समय से पहले मृत्यु के खतरे को कम कर सकती है।
यह सिंड्रोम दिल की बीमारी, किडनी की समस्या, डायबिटीज और मोटापे जैसे कारकों से जुड़ा होता है। ऐसे में रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी सकारात्मक असर डाल सकते हैं।
घरेलू काम भी बन सकते हैं व्यायाम
विशेषज्ञों के अनुसार, झाड़ू-पोछा लगाना, खड़े होकर खाना बनाना, हाथ से कपड़े धोना या बागवानी करना भी शरीर को सक्रिय बनाए रखने में मदद करता है। इन गतिविधियों को हल्की शारीरिक मेहनत की श्रेणी में रखा जाता है, जिन्हें बिना ज्यादा थकान या सांस फूलने के किया जा सकता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन लगभग एक घंटे हल्की गतिविधि बढ़ा दे, तो असमय मृत्यु के खतरे में 14 से 20 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। यह आंकड़ा उन लोगों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जो पहले से ही हृदय या किडनी संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
शोध में सामने आए तथ्य
जर्नल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित अध्ययन में 2003 से 2006 के बीच किए गए एक बड़े सर्वेक्षण के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें करीब 7,200 वयस्कों की स्वास्थ्य स्थिति और उनकी शारीरिक गतिविधि का रिकॉर्ड शामिल था। प्रतिभागियों के ब्लड सैंपल, शारीरिक परीक्षण और एक्सेलेरोमीटर नामक उपकरण के जरिए सात दिनों तक उनकी गतिविधियों को मापा गया।
अध्ययन से यह स्पष्ट हुआ कि गतिविधि का स्तर चाहे हल्का ही क्यों न हो, शरीर को सक्रिय रखने से दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। विशेषकर उन लोगों के लिए, जो उन्नत अवस्था के रोगों से पीड़ित हैं और तेज व्यायाम करने में सक्षम नहीं हैं, यह एक व्यवहारिक विकल्प साबित हो सकता है।
विशेषज्ञों की राय
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि संतुलित आहार, नियमित दवा और हल्की शारीरिक गतिविधि का संयोजन कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम की रोकथाम में अहम भूमिका निभाता है। जॉन्स हॉपकिन्स ब्लूमबर्ग स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रोफेसर माइकल फैंग के अनुसार, वॉकिंग या बागवानी जैसी साधारण गतिविधियां भी दिल की सेहत के लिए लाभकारी हो सकती हैं। हालांकि गंभीर हृदय रोगियों में इनके दीर्घकालिक प्रभावों पर और अध्ययन की जरूरत है।
छोटे कदम, बड़ा बदलाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में छोटे बदलाव से शुरुआत करनी चाहिए। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग, थोड़ी दूर तक पैदल चलना या घर के काम में सक्रिय भागीदारी जैसे उपाय शरीर को गतिशील बनाए रखते हैं। नियमितता ही यहां सबसे बड़ा कारक है।
कुल मिलाकर, यह स्पष्ट है कि जिम ही स्वास्थ्य का एकमात्र रास्ता नहीं है। यदि समय की कमी है, तो रोजमर्रा की गतिविधियों को ही व्यायाम का हिस्सा बनाकर भी दिल, किडनी और मेटाबॉलिज्म से जुड़ी बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है।



