Rockstar – इम्तियाज अली ने बताया क्यों फिल्म के अंत में मर गई हीर…
Rockstar – रणबीर कपूर और नरगिस फाखरी की फिल्म ‘रॉकस्टार’ आज भी हिंदी सिनेमा की यादगार प्रेम कहानियों में गिनी जाती है। 2011 में रिलीज हुई इस फिल्म ने अपने संगीत, कहानी और भावनात्मक प्रस्तुति के कारण दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी थी। फिल्म का आखिरी हिस्सा खास तौर पर लोगों के लिए काफी भावुक रहा, क्योंकि कहानी में हीर का किरदार अंत में जीवित नहीं रहता। वर्षों बाद निर्देशक इम्तियाज अली ने एक फैनमीटअप के दौरान बताया कि फिल्म के क्लाइमैक्स में यह मोड़ आखिर क्यों आया और इसकी पृष्ठभूमि क्या थी।

शुरुआती स्क्रिप्ट में अलग था कहानी का अंत
इम्तियाज अली ने बातचीत के दौरान बताया कि फिल्म की शुरुआती कहानी आज दर्शकों ने जो देखी उससे कुछ अलग थी। उन्होंने बताया कि पहली बार जब उन्होंने ‘रॉकस्टार’ की स्क्रिप्ट लिखी थी, तब उनके दिमाग में कहानी का अंत अलग तरह से तय किया गया था। उस समय उनकी इच्छा थी कि हीर का किरदार जीवित रहे और कहानी का अंत थोड़ा अलग भाव में खत्म हो।
हालांकि उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में तैयार किया गया पूरा स्क्रिप्ट ड्राफ्ट बाद में कहीं खो गया। जब कई साल बाद उन्हें इस फिल्म को बनाने का मौका मिला और उन्होंने उस पुराने ड्राफ्ट को खोजने की कोशिश की, तो वह कहीं भी नहीं मिला। न तो वह कागज पर सुरक्षित था और न ही कंप्यूटर में उसकी कोई कॉपी मिल सकी। इस वजह से उन्हें पूरी कहानी को फिर से लिखना पड़ा।
दोबारा लिखते समय बदलती गई कहानी की दिशा
निर्देशक के अनुसार जब उन्होंने दोबारा फिल्म की कहानी लिखनी शुरू की, तो कथानक धीरे-धीरे एक अलग दिशा में आगे बढ़ने लगा। कहानी के पात्रों और उनके भावनात्मक संघर्ष को लिखते हुए उन्हें महसूस हुआ कि कहानी का स्वर पहले से ज्यादा गहरा और संवेदनशील हो रहा है। इसी प्रक्रिया के दौरान हीर के किरदार का दुखद अंत कहानी का हिस्सा बन गया।
इम्तियाज अली ने कहा कि कई बार लेखन की प्रक्रिया में कहानी खुद अपने रास्ते तय कर लेती है। उनके साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जब वह फिल्म के अंतिम हिस्से तक पहुंचे, तो कहानी की परिस्थितियां और भावनात्मक प्रवाह इस तरह बन चुका था कि हीर का जीवित रहना स्वाभाविक नहीं लग रहा था।
हीर-रांझा की लोककथा से मिला प्रभाव
इम्तियाज अली ने यह भी बताया कि फिल्म की कहानी लिखते समय वह प्रसिद्ध पंजाबी प्रेम कथा हीर-रांझा से काफी प्रभावित थे। यह प्रेम कहानी भारतीय उपमहाद्वीप की सबसे चर्चित लोककथाओं में से एक मानी जाती है, जिसमें प्रेम और विछोह की गहरी भावनाएं दिखाई देती हैं।
निर्देशक के अनुसार इसी लोककथा के प्रभाव ने फिल्म के किरदारों और उनके भावनात्मक सफर को भी प्रभावित किया। यही कारण है कि फिल्म में लड़की का नाम भी हीर रखा गया। कहानी के अंत में जो घटनाएं सामने आती हैं, उनमें इस पारंपरिक प्रेम कथा की झलक भी देखी जा सकती है।
भावनात्मक क्लाइमैक्स ने दर्शकों पर छोड़ी गहरी छाप
‘रॉकस्टार’ का क्लाइमैक्स रिलीज के समय से ही चर्चा का विषय रहा है। फिल्म में जॉर्डन के किरदार का दर्द, संगीत के माध्यम से उसकी अभिव्यक्ति और हीर के साथ उसका रिश्ता दर्शकों के लिए बेहद भावुक अनुभव बन गया था। हीर के निधन के बाद जॉर्डन का अकेलापन और उसका संघर्ष कहानी को एक अलग भावनात्मक ऊंचाई देता है।
फिल्म के संगीत, खासकर ए.आर. रहमान के गीतों ने भी इस भावनात्मक यात्रा को और प्रभावशाली बनाया। यही वजह है कि फिल्म रिलीज के कई साल बाद भी इसके गाने और कहानी दर्शकों के बीच लोकप्रिय बने हुए हैं।
समय के साथ और मजबूत हुई फिल्म की पहचान
रिलीज के समय ‘रॉकस्टार’ को समीक्षकों और दर्शकों से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं मिली थीं, लेकिन समय के साथ इस फिल्म की पहचान और मजबूत होती गई। आज इसे हिंदी सिनेमा की उन फिल्मों में गिना जाता है जिनमें प्रेम, कला और आत्मसंघर्ष की कहानी को अनोखे ढंग से प्रस्तुत किया गया।
इम्तियाज अली के हालिया बयान से यह भी साफ होता है कि किसी फिल्म की कहानी केवल एक तय योजना से नहीं बनती, बल्कि लेखन और रचनात्मक प्रक्रिया के दौरान कई बार परिस्थितियां और प्रेरणाएं उसके स्वरूप को बदल देती हैं। ‘रॉकस्टार’ का क्लाइमैक्स भी इसी रचनात्मक यात्रा का परिणाम था, जिसने फिल्म को यादगार बना दिया।



