Mahi Gill Interview on Lohri: गोवा में रहकर भी पंजाब की बेटी ने नहीं छोड़ी अपनी जड़ें, अब फिल्मी दुनिया में मचाएंगी गदर…
Mahi Gill Interview on Lohri: पंजाब की मिट्टी से जुड़ी मशहूर अभिनेत्री माही गिल के लिए लोहड़ी महज एक त्योहार नहीं, बल्कि भावनाओं का एक गहरा समंदर है। चंडीगढ़ में बिताए अपने बचपन को याद करते हुए माही भावुक हो जाती हैं और बताती हैं कि उस दौर में (Childhood Memories) का मतलब सिर्फ परिवार का साथ और घर के आंगन में जलती लोहड़ी की आग हुआ करती थी। आज भले ही उनकी फैमिली अमेरिका में बस गई है और वह खुद काम के सिलसिले में मुंबई या गोवा में रहती हैं, लेकिन अपनी जड़ों की वह गर्माहट आज भी उनके ज़हन में ताज़ा है।

परंपराओं का निर्वाह और परिवार की अटूट एकजुटता
पुराने दिनों को याद करते हुए माही बताती हैं कि उत्तर भारत में लोहड़ी की रौनक देखते ही बनती थी। पूरा मोहल्ला एक जगह इकट्ठा होता था, आग जलाई जाती थी और फिर रेवड़ी व गजक का प्रसाद बांटा जाता था। वे कहती हैं कि (Traditional Festivals) की सबसे खूबसूरत बात यह थी कि अगर किसी घर में नई शादी हुई हो या बच्चे का जन्म हुआ हो, तो पूरा परिवार वहां खुशियां बांटने पहुंच जाता था। बचपन के वो पल जब मम्मी, पापा और भाई-बहन सब साथ होते थे, माही के लिए आज भी किसी अनमोल खजाने से कम नहीं हैं।
नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से रूबरू कराने की चुनौती
माही गिल अब खुद एक मां हैं और उनकी एक 9 साल की बेटी है। हालांकि वे अब गोवा में रहती हैं, जहां पंजाब जैसी लोहड़ी का माहौल नहीं होता, फिर भी वे अपनी विरासत को जीवित रखने की पूरी कोशिश करती हैं। वे मानती हैं कि (Cultural Heritage) को अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हर माता-पिता की जिम्मेदारी है। माही चाहती हैं कि उनकी बेटी, जो पंजाब के बाहर पली-बढ़ी है, वह भी समझे कि उसकी जड़ें कहां हैं और हमारी परंपराएं कितनी समृद्ध हैं। इसी सोच के साथ वे हर साल लोहड़ी का आयोजन बड़े गर्व के साथ करती हैं।
करियर से ब्रेक लेने का साहसी और निस्वार्थ फैसला
माही गिल के करियर में एक ऐसा दौर आया जब वे अचानक पर्दे से गायब हो गईं। उन्होंने अमर उजाला को दिए इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने जानबूझकर करीब चार से छह साल का लंबा ब्रेक लिया था। इस (Career Break) की सबसे बड़ी वजह उनकी बेटी थी। माही अपनी बेटी के बचपन का हर लम्हा जीना चाहती थीं और उसकी परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती थीं। उन्होंने काम के बजाय अपनी संतान को प्राथमिकता दी और आज उन्हें इस फैसले पर रत्ती भर भी पछतावा नहीं है, क्योंकि उन्होंने एक मां होने का धर्म पूरी शिद्दत से निभाया।
साल 2026 और माही गिल का धमाकेदार कमबैक
अब जब उनकी बेटी थोड़ी बड़ी और समझदार हो गई है, तो माही गिल एक बार फिर अपने पुराने अंदाज में लौटने के लिए तैयार हैं। उनके लिए साल 2026 एक नई शुरुआत जैसा है और उन्होंने फिर से लाइट, कैमरा और एक्शन की दुनिया में कदम रख दिया है। अपने इस (Acting Career) के दूसरे पड़ाव को लेकर वे काफी उत्साहित हैं। सेट पर फिर से वही माहौल और पुराने दोस्तों का साथ पाकर वे खुद को बहुत भाग्यशाली मानती हैं। वे कहती हैं कि भगवान ने उन्हें एक सपोर्टिव पति और एक प्यारी बेटी के रूप में सब कुछ दिया है, जिसके लिए वे हमेशा आभारी रहेंगी।
लंबे अंतराल के बाद कैमरे का सामना करने का अनुभव
तकरीबन चार साल तक अभिनय से दूर रहने के बाद जब माही गिल दोबारा शूटिंग सेट पर पहुंचीं, तो उनके मन में थोड़ी घबराहट होना स्वाभाविक था। ‘रक्तांचल’ की शूटिंग के पहले दिन के अनुभव को साझा करते हुए वे बताती हैं कि (Professional Acting) की दुनिया में इतने समय बाद लौटना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन जैसे ही डायरेक्टर ने ‘एक्शन’ बोला और माही ने अपने डायलॉग्स पढ़ने शुरू किए, उन्हें महसूस हुआ कि एक कलाकार कभी अपनी कला को नहीं भूलता। टीम के सहयोग ने उनकी सारी झिझक मिटा दी और उन्होंने शानदार वापसी की।
गोवा की लोहड़ी और पंजाब से आता ‘सरसों का साग’
माही भले ही गोवा की वादियों में रहती हों, लेकिन उनके खान-पान में आज भी शुद्ध पंजाबी स्वाद ही बसता है। वे बताती हैं कि लोहड़ी का जश्न बिना सरसों के साग और गाजर के हलवे के अधूरा है। माही इतनी परंपरावादी हैं कि वे लोहड़ी के लिए खास तौर पर (Authentic Punjabi Food) का स्वाद चखने के लिए पंजाब से साग और मुंबई से अन्य जरूरी सामान मंगवाती हैं। डाइटिंग को एक तरफ रखकर उस दिन वे जमकर पंजाबी व्यंजनों का लुत्फ उठाती हैं और अपनी मिट्टी की खुशबू को महसूस करती हैं।
पंजाबी गानों की थाप और डांस का दीवानापन
लोहड़ी के त्यौहार में अगर नाच-गाना न हो, तो वह फीका ही लगता है। माही गिल के लिए भी आग के चारों ओर घूमना और पुराने फ्लेवर वाले (Punjabi Folk Songs) पर डांस करना सबसे ज्यादा मस्ती भरा होता है। वे दुनिया के किसी भी कोने में रहें, लेकिन लोहड़ी की शाम वे अपनी जड़ों को याद करते हुए प्रार्थना करना और झूमना कभी नहीं भूलतीं। उनके लिए यह त्यौहार सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि जीवन की खुशियों को सेलिब्रेट करने का एक जरिया है।
रिश्तों की गर्माहट और शुक्रगुजारी का भाव
अपने जीवन के इस मोड़ पर माही गिल बेहद संतुष्ट और खुश नजर आती हैं। वे अपनी जिंदगी के हर उतार-चढ़ाव और हर रिश्ते के लिए ईश्वर का शुक्रिया अदा करती हैं। उनके लिए (Life Gratitude) सबसे जरूरी है, क्योंकि एक समझदार परिवार और बेहतरीन काम का मेल हर किसी को नसीब नहीं होता। लोहड़ी के पावन पर्व पर वे अपनी पुरानी यादों को संजोते हुए भविष्य की नई योजनाओं की ओर कदम बढ़ा रही हैं, जो उनके फैंस के लिए भी एक बड़ी खुशखबरी है।
माही गिल का दर्शकों के लिए खास संदेश
अंत में माही गिल अपनी बातों को समेटते हुए कहती हैं कि त्यौहार हमें अपनी जड़ों की ओर लौटने का मौका देते हैं। वे अपने चाहने वालों से भी यही अपील करती हैं कि वे अपनी (Cultural Values) को कभी न छोड़ें। माही की यह यात्रा यह साबित करती है कि एक महिला अपने करियर और परिवार के बीच सही संतुलन बनाकर न केवल एक अच्छी मां बन सकती है, बल्कि अपनी पहचान को भी नई ऊंचाइयों पर ले जा सकती है। उनकी वापसी का यह सफर उन सभी के लिए प्रेरणादायक है जो अपनी जिम्मेदारियों के लिए अपने सपनों को कुछ समय के लिए विराम देते हैं



