मनोरंजन

Bhagyashree – 90 के दशक और आज के सिनेमा पर खुलकर बोलीं अभिनेत्री

Bhagyashree – सलमान खान के साथ फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाली अभिनेत्री भाग्यश्री ने हाल ही में बदलते फिल्मी दौर पर अपनी स्पष्ट राय रखी। 90 के दशक की लोकप्रिय अभिनेत्री ने आज के सिनेमा और पुराने दौर के बीच के अंतर पर बात करते हुए कहा कि समय के साथ दर्शकों की पसंद और समाज की सोच दोनों बदली हैं। हालांकि, उन्होंने मौजूदा फिल्मों में बढ़ती अंतरंगता को लेकर असहजता भी जताई और इसे लेकर संतुलित दृष्टिकोण की जरूरत बताई।

मनोरंजन के बदलते माध्यम और दर्शकों की पसंद

एक बातचीत के दौरान भाग्यश्री ने कहा कि 90 के दशक में सिनेमा परिवारों के लिए एक साथ बैठकर समय बिताने का प्रमुख माध्यम था। उस समय टीवी चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म की भरमार नहीं थी। लोग फिल्मों को एक साझा अनुभव की तरह देखते थे। आज हालात बदल चुके हैं। परिवार छोटे हो गए हैं और हर व्यक्ति के पास मनोरंजन के अलग-अलग साधन उपलब्ध हैं। मोबाइल, ओटीटी और सोशल मीडिया ने दर्शकों को कई विकल्प दे दिए हैं। ऐसे में सिनेमा भी विविधता की ओर बढ़ा है।

उन्होंने माना कि आज के दौर में अलग-अलग विषयों पर फिल्में बन रही हैं, जो अपने-अपने दर्शक वर्ग को ध्यान में रखती हैं। लेकिन इस विविधता के बीच पारिवारिक दर्शकों की संवेदनाओं का ध्यान रखना भी जरूरी है।

इंटिमेसी पर संतुलित नजरिया

अभिनेत्री का कहना है कि यथार्थवादी सिनेमा बनाना स्वागत योग्य है, लेकिन हर कहानी को प्रस्तुत करने के लिए अत्यधिक अंतरंग दृश्यों की जरूरत नहीं होती। उन्होंने कहा कि ऐसी फिल्में भी सफल हो सकती हैं जिन्हें परिवार के साथ बैठकर बिना झिझक देखा जा सके। उनके अनुसार, कहानी कहने के कई तरीके हो सकते हैं और साहस दिखाने का अर्थ केवल सीमाओं को पार करना नहीं है।

भाग्यश्री ने यह भी जोड़ा कि सिनेमा समाज का आईना होता है, लेकिन इसे समाज को दिशा देने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। दर्शकों के बीच विभिन्न आयु वर्ग के लोग होते हैं, इसलिए संतुलन बनाए रखना अहम है।

90 के दशक में महिलाओं की भूमिका

बातचीत के दौरान उन्होंने 90 के दशक के किरदारों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय फिल्मों में पारंपरिक सोच हावी रहती थी। कई कहानियों में पुरुष प्रधान दृष्टिकोण दिखाई देता था, जिससे अभिनेत्रियों के लिए शादी के बाद काम के अवसर सीमित हो जाते थे। उन्होंने माना कि उस दौर में विवाह के बाद महिला कलाकारों के करियर को लेकर संदेह की स्थिति रहती थी।

हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि आज परिस्थितियां बदली हैं। शिक्षा और जागरूकता बढ़ने से महिलाओं को अपने करियर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने का अवसर मिल रहा है। समाज में कामकाजी महिलाओं के प्रति सोच में धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव आया है।

करियर की शुरुआत से अब तक का सफर

भाग्यश्री ने 1989 में रिलीज हुई फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। यह फिल्म उस समय बड़ी हिट साबित हुई और उन्हें पहचान दिलाई। शादी के बाद उन्होंने कुछ समय के लिए फिल्म इंडस्ट्री से दूरी बना ली थी। बाद में उन्होंने फिल्मों में वापसी की और अलग-अलग भाषाओं की परियोजनाओं में काम किया।

हाल के वर्षों में वह ‘थलाइवी’, ‘राधे श्याम’ और ‘छत्रपति’ जैसी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। अब वह रितेश देशमुख की आगामी फिल्म ‘राजा शिवाजी’ में दिखाई देंगी, जो 1 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच उत्सुकता बनी हुई है।

सिनेमा और समाज का संबंध

भाग्यश्री की बातों से साफ है कि वह सिनेमा को केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक प्रभाव वाला माध्यम मानती हैं। उनके अनुसार, बदलाव स्वाभाविक है, लेकिन मूल संवेदनाओं और पारिवारिक मूल्यों को ध्यान में रखना भी जरूरी है। बदलते समय के साथ फिल्मों की शैली बदली है, पर दर्शकों की भावनाएं आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं।

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