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SalaryRevision – आठवें वेतन आयोग के सामने कर्मचारियों ने रखीं बड़ी मांगें

SalaryRevision – केंद्रीय कर्मचारियों के वेतन और पेंशन व्यवस्था को लेकर आठवें वेतन आयोग के सामने कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे गए हैं। मंगलवार को पुणे में महाराष्ट्र ओल्ड पेंशन ऑर्गेनाइजेशन के प्रतिनिधियों ने आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई और अन्य सदस्यों से मुलाकात कर वेतन ढांचे में बड़े बदलाव की मांग की। इस बैठक में न्यूनतम मूल वेतन बढ़ाने से लेकर पेंशन प्रणाली और भत्तों में संशोधन तक कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।

संगठन की ओर से बताया गया कि बैठक करीब आधे घंटे तक चली, जिसमें कर्मचारियों की आर्थिक जरूरतों, महंगाई और कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए 10 प्रमुख मांगें आयोग के सामने रखी गईं। इन प्रस्तावों का असर भविष्य में लाखों केंद्रीय और राज्य कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

न्यूनतम वेतन 65 हजार रुपये करने की मांग

बैठक में सबसे प्रमुख मांग एंट्री लेवल बेसिक सैलरी को मौजूदा 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 65 हजार रुपये करने की रही। संगठन का कहना है कि मौजूदा महंगाई और पारिवारिक खर्चों को देखते हुए वर्तमान वेतन संरचना पर्याप्त नहीं है। प्रतिनिधियों ने आयोग के सामने तर्क दिया कि यह प्रस्ताव वास्तविक घरेलू जरूरतों और आर्थिक आंकड़ों पर आधारित है।

इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 3.8 करने का सुझाव भी दिया गया। कर्मचारियों का मानना है कि इससे वेतन संशोधन अधिक व्यावहारिक और प्रभावी हो सकेगा।

परिवार की नई परिभाषा पर जोर

संगठन ने न्यूनतम वेतन तय करने के लिए परिवार की परिभाषा बदलने की भी मांग उठाई। वर्तमान व्यवस्था में तीन सदस्यों को आधार माना जाता है, जबकि कर्मचारियों ने इसे बढ़ाकर पांच सदस्य करने का प्रस्ताव दिया है। इसमें कर्मचारी, जीवनसाथी, दो बच्चे और माता-पिता को शामिल करने की बात कही गई है।

प्रतिनिधियों का कहना है कि आज के समय में परिवार की वास्तविक जरूरतों का सही आकलन तभी संभव है जब वेतन निर्धारण में बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों के खर्च को भी शामिल किया जाए।

DA, HRA और अन्य भत्तों में संशोधन का प्रस्ताव

बैठक में महंगाई भत्ते और मकान किराया भत्ते को लेकर भी नए सुझाव दिए गए। संगठन ने कहा कि हर बार DA संशोधन के दौरान कम से कम 4 प्रतिशत की वृद्धि सुनिश्चित होनी चाहिए। साथ ही 50 प्रतिशत DA होने पर इसे मूल वेतन में स्वतः जोड़ने की मांग रखी गई।

HRA को DA से अलग रखते हुए शहरों की श्रेणी के अनुसार नई दरें तय करने का सुझाव दिया गया। प्रस्ताव में X श्रेणी के शहरों के लिए 36 प्रतिशत, Y के लिए 24 प्रतिशत और Z श्रेणी के लिए 12 प्रतिशत HRA देने की बात शामिल है।

यात्रा भत्ते में भी 2.5 गुना तक बढ़ोतरी की मांग की गई है। इसके अलावा नक्सल और आदिवासी क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए विशेष भत्तों में वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया।

पेंशन और करियर प्रगति से जुड़े मुद्दे

संगठन ने पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू करने की मांग दोहराई। प्रतिनिधियों का कहना है कि राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत आने वाले लाखों कर्मचारियों के भविष्य को लेकर चिंता बनी हुई है। इसी वजह से OPS लागू करने या NPS में न्यूनतम रिटर्न की गारंटी देने का सुझाव आयोग को दिया गया।

इसके अलावा नियोक्ता के योगदान को बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत करने और अतिरिक्त पेंशन की शुरुआत 80 वर्ष की जगह 75 वर्ष से करने का प्रस्ताव रखा गया। वार्षिक वेतन वृद्धि को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत करने की भी मांग की गई है।

आयोग की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

कर्मचारी संगठनों का मानना है कि बढ़ती महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और जीवनशैली में बदलाव को देखते हुए वेतन और पेंशन ढांचे में सुधार जरूरी हो गया है। अब देशभर के कर्मचारियों की नजर आठवें वेतन आयोग की सिफारिशों पर टिकी है।

यदि इन मांगों का बड़ा हिस्सा स्वीकार किया जाता है तो इसका असर सरकारी कर्मचारियों की आय, पेंशन व्यवस्था और सरकारी वित्तीय ढांचे पर व्यापक रूप से दिखाई दे सकता है।

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