FoodOil – त्योहारी मांग के बीच खाद्य तेल आपूर्ति पर दबाव, बढ़ सकती हैं कीमतें
FoodOil- त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले देश में खाद्य तेलों की उपलब्धता और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति में आई रुकावट और आयात में कमी का असर अब घरेलू बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात बने रहे तो आने वाले महीनों में रसोई का खर्च और बढ़ सकता है।

आयात में गिरावट से बढ़ी चिंता
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्ट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, तेल वर्ष 2025-26 के जून 2026 में देश का खाद्य तेल आयात पिछले वर्ष की तुलना में 29 प्रतिशत कम रहा। मई में जहां 13.39 लाख टन खाद्य तेल का आयात हुआ था, वहीं जून में यह घटकर 11.11 लाख टन रह गया। पाम तेल का आयात 10.5 प्रतिशत घटकर 4.87 लाख टन और सोयाबीन तेल का आयात 23 प्रतिशत की गिरावट के साथ 3.81 लाख टन दर्ज किया गया। आयात में कमी का सीधा असर बाजार में उपलब्धता और खुदरा कीमतों पर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
काला सागर क्षेत्र का संकट बना बड़ी वजह
खाद्य तेल बाजार पर सबसे अधिक असर सूरजमुखी तेल की आपूर्ति में आई बाधा से पड़ा है। वैश्विक स्तर पर सूरजमुखी तेल के निर्यात में रूस और यूक्रेन की संयुक्त हिस्सेदारी करीब 63 प्रतिशत है। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष और काला सागर क्षेत्र में बढ़े सुरक्षा जोखिम के कारण समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं। इसके चलते भारत के लिए भेजे जाने वाले कई जहाजों की आवाजाही में लगभग 60 दिन तक की देरी हो रही है, जिससे आयातकों की चिंता बढ़ गई है।
घरेलू उत्पादन पर भी मौसम का असर
इस बार कमजोर मानसून ने तिलहन की खेती की रफ्तार भी धीमी कर दी है। अब तक करीब 163.54 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तिलहन की बुवाई हुई है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 3.45 प्रतिशत कम है। सामान्य परिस्थितियों में यह क्षेत्रफल लगभग 200 लाख हेक्टेयर माना जाता है। यदि उत्पादन अपेक्षा से कम रहता है तो आयात पर निर्भरता और बढ़ सकती है, जिससे कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बनने की आशंका है।
अधिकांश खाद्य तेल पहले ही हो चुके हैं महंगे
उपभोक्ता मामलों विभाग के ताजा आंकड़े बताते हैं कि बीते महीनों में विभिन्न खाद्य तेलों की खुदरा कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। सूरजमुखी तेल की कीमत करीब 18 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि पाम तेल लगभग 14 प्रतिशत और सोयाबीन तेल करीब 12 प्रतिशत महंगा हुआ है। मूंगफली और सरसों तेल के दामों में भी क्रमशः लगभग 9 और 7 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसका असर सीधे घरेलू रसोई के मासिक बजट पर पड़ रहा है।
आगे भी बढ़ सकते हैं दाम
बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि सूरजमुखी तेल की आपूर्ति सीमित रहने से इसकी मांग का दबाव पाम और सोयाबीन तेल पर बढ़ रहा है। दूसरी ओर, इंडोनेशिया और मलेशिया में बायोफ्यूल के लिए पाम तेल की बढ़ती खपत तथा वैश्विक स्तर पर सीमित स्टॉक भी कीमतों को सहारा दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले महीनों में सरसों, पाम, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल की खुदरा कीमतों में 8 से 12 प्रतिशत तक अतिरिक्त बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
वैकल्पिक स्रोतों से बढ़ाई जा रही खरीद
आपूर्ति में संभावित कमी को देखते हुए भारतीय आयातकों ने नए देशों से खरीद बढ़ाने की रणनीति अपनाई है। व्यापारियों ने सूरजमुखी तेल का बड़ा हिस्सा अब अर्जेंटीना से मंगाना शुरू किया है। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया से कैनोला तेल तथा अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल का आयात भी बढ़ाया जा रहा है। उद्योग से जुड़े अनुमान बताते हैं कि जुलाई के दौरान पाम तेल का आयात करीब 40 प्रतिशत बढ़कर 7 लाख टन तक पहुंच सकता है, जिससे बाजार में उपलब्धता बनाए रखने में कुछ राहत मिल सकती है।