EconomyFocus – आयात खर्च घटाने के लिए सरकार बना रही है नई रणनीति
EconomyFocus – बढ़ते आयात बिल और विदेशी मुद्रा पर बढ़ते दबाव के बीच केंद्र सरकार अब खर्च में कटौती और खपत नियंत्रण को लेकर नई रणनीति पर काम कर रही है। कच्चे तेल, सोना, खाद्य तेल, उर्वरक और विदेशी यात्राओं पर होने वाले बड़े खर्च को कम करने के लिए अलग-अलग स्तर पर योजनाएं तैयार की जा रही हैं। सरकारी आकलन के अनुसार यदि इन क्षेत्रों में तय लक्ष्य के मुताबिक कटौती होती है तो देश को करीब 59 अरब डॉलर से अधिक की संभावित बचत हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे व्यापार घाटा और चालू खाता घाटा नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

ईंधन खपत कम करने पर सरकार का जोर
सरकार की सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल के आयात को लेकर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। तेल महंगा होने से परिवहन लागत बढ़ती है और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी प्रभावित होते हैं। इसी वजह से सरकार ईंधन की खपत में करीब 20 प्रतिशत तक कमी लाने का लक्ष्य तैयार कर रही है। इसके लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने, ऊर्जा बचत और वैकल्पिक ईंधन के इस्तेमाल पर जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि मांग कम होने से आयात पर दबाव घटेगा और कीमतों को स्थिर रखने में मदद मिलेगी।
सोने की बढ़ती मांग बनी चुनौती
भारत में सोने की मांग लगातार बढ़ रही है और यही सरकार की चिंता का एक बड़ा कारण बन गई है। कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के बावजूद लोगों की खरीदारी में खास कमी नहीं देखी जा रही। शादी-ब्याह, पारंपरिक निवेश और सांस्कृतिक महत्व की वजह से सोने की मांग मजबूत बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में देश का सोना आयात बिल बढ़कर 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्षों की तुलना में काफी ज्यादा है। इससे व्यापार घाटे पर अतिरिक्त दबाव पड़ा है।
आयात शुल्क बढ़ाने पर फिलहाल नहीं विचार
सोने के आयात को नियंत्रित करने के लिए आयात शुल्क बढ़ाने की संभावना पर चर्चा जरूर हुई है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक सरकार फिलहाल ऐसा कोई कदम उठाने के पक्ष में नहीं है। वर्तमान में सोने पर कुल छह प्रतिशत आयात शुल्क लागू है, जिसमें कस्टम ड्यूटी और कृषि सेस शामिल हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि शुल्क बढ़ाया जाता है तो आभूषण महंगे हो सकते हैं और इसका असर बाजार पर पड़ेगा। इसलिए सरकार फिलहाल संतुलित नीति अपनाने की कोशिश कर रही है।
व्यापार घाटा बढ़ने से बढ़ी चिंता
आंकड़ों के अनुसार लगातार बढ़ते आयात के कारण देश का व्यापार घाटा भी तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 333 अरब डॉलर से अधिक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सोने और ऊर्जा उत्पादों का आयात इसी गति से बढ़ता रहा तो चालू खाता घाटा भी तय सीमा से ऊपर जा सकता है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये की स्थिति पर असर पड़ने की आशंका है।
विदेशी यात्रा और उर्वरक खर्च पर भी नजर
सरकार केवल तेल और सोने तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी यात्रा और उर्वरक आयात पर होने वाले खर्च को भी नियंत्रित करने की योजना बना रही है। अधिकारियों के अनुसार घरेलू उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने के उपायों पर काम चल रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है that लंबे समय तक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए आयात प्रबंधन और खपत नियंत्रण दोनों जरूरी होंगे।