RuralMarket – बिहार में 203 ग्रामीण हाट बनेंगे, जीविका समूहों को मिलेगा स्थायी बाजार
RuralMarket– बिहार सरकार ने जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं के उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्यभर में 203 आधुनिक ग्रामीण हाट विकसित किए जाएंगे, जहां स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अपने उत्पाद एक ही स्थान पर बेच सकेंगी। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने विभागीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इस योजना को तय समयसीमा में लागू करने के निर्देश दिए। सरकार का उद्देश्य महिलाओं की आय बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती देना है।

ग्रामीण हाट निर्माण की प्रक्रिया तेज
पुराने सचिवालय स्थित कार्यालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने बताया कि 203 ग्रामीण हाटों के लिए स्थानों का चयन लगभग पूरा हो चुका है। कई जिलों से अंतिम प्रस्ताव भी विभाग को प्राप्त हो गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, नालंदा सहित कुछ जिलों की योजनाएं अंतिम चरण में हैं और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।
एक ही परिसर में उपलब्ध होगी बिक्री की सुविधा
सरकार चाहती है कि जीविका समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले विभिन्न उत्पादों की बिक्री के लिए महिलाओं को अलग-अलग बाजारों का सहारा न लेना पड़े। इसी उद्देश्य से सभी ग्रामीण हाटों में एकीकृत विपणन व्यवस्था विकसित की जाएगी। बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए जीविका समूहों द्वारा तैयार किए जाने वाले पोशाकों की आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी रहे और उत्पादन व्यवस्था को मजबूत बनाया जाए।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे ग्रामीण हाट
योजना के तहत प्रत्येक ग्रामीण हाट में दुकानों के अलावा भंडारण कक्ष, शेडयुक्त बिक्री स्थल, कार्यालय और स्वच्छ शौचालय जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पंचायत, प्रखंड और जिला स्तर के लिए मॉडल डीपीआर तैयार किया जा चुका है। परियोजना के क्रियान्वयन में नाबार्ड का भी सहयोग लिया जाएगा ताकि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।
महिलाओं के रोजगार पर विशेष जोर
बैठक में महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए बकरी पालन को भी प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। विशेष रूप से जमुनापारी नस्ल की बकरियों के पालन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। विभाग का मानना है कि इस नस्ल से दूध और मांस दोनों का बेहतर उत्पादन होता है, जिससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी में वृद्धि हो सकती है।
चयनित जिलों में शुरू होगी विशेष पहल
बकरी पालन से जुड़े उत्पादन समूह चंपारण, बांका, जमुई, मुंगेर, शेखपुरा, नवादा, नालंदा, गया, औरंगाबाद तथा कैमूर जैसे जिलों में विकसित किए जाएंगे। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पश्चिम चंपारण के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले थारू समुदाय को इस योजना का प्राथमिक लाभ दिया जाए। साथ ही बकरी के दूध के संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन की व्यवस्था विकसित करने के लिए पशुपालन विभाग और नाबार्ड के साथ समन्वय बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।