Rabri Devi Bungalow Vacate News: लालू परिवार ने छोड़ा 10 सर्कुलर रोड, सामान की शिफ्टिंग के साथ हुआ राजनीतिक युग का अंत
Rabri Devi Bungalow Vacate News: बिहार की राजनीति का सबसे शक्तिशाली और चर्चित केंद्र रहा पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का सरकारी आवास अब इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। गुरुवार की देर रात पटना के ’10 सर्कुलर रोड’ बंगले के बाहर हलचल सामान्य से कहीं अधिक थी, जब अंधेरे में (Political Power Center Shifts) कई पिक-अप वैन के जरिए घर का सामान बाहर निकलते देखा गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देर रात तक वाहनों की आवाजाही जारी रही, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि लालू परिवार ने अब इस बंगले को पूरी तरह से खाली करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। हालांकि, आधिकारिक रूप से यह नहीं बताया गया है कि यह सामान हार्डिंग रोड स्थित नए आवास पर गया है या कहीं और।

दो दशकों की सियासत का मूक गवाह बना यह बंगला
यह केवल ईंट और पत्थर (Rabri Devi Bungalow Vacate News) का मकान नहीं था, बल्कि बिहार की राजनीति की धुरी था जिसने पिछले दो दशकों में कई सरकारों को बनते और बिगड़ते देखा है। साल 2005 में जब लालू-राबड़ी परिवार ने (Lalu Yadav Political Legacy) मुख्यमंत्री आवास ‘1 अणे मार्ग’ छोड़ा था, तब वे इसी बंगले में शिफ्ट हुए थे। तब से लेकर आज तक राजद की हर छोटी-बड़ी गतिविधि, महत्वपूर्ण बैठकें और ऐतिहासिक फैसले इसी आवास की चहारदीवारी के भीतर हुए। इस बंगले के खाली होने को बिहार की राजनीति में एक बड़े प्रतीकात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
भवन निर्माण विभाग का नोटिस और एक महीने की मोहलत
राज्य में सत्ता परिवर्तन और नई सरकार के गठन के बाद से ही इस बंगले को लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू हो गई थी। भवन निर्माण विभाग ने लगभग एक महीने पहले ही पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को (Government Housing Regulations) आवास खाली करने का औपचारिक निर्देश दिया था। सरकार की ओर से तर्क दिया गया था कि नियमों के तहत पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए आवंटित आवासों की श्रेणी में बदलाव किया गया है। इसी आदेश के अनुपालन में अब सामान की शिफ्टिंग की जा रही है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल बंगले की सुरक्षा व्यवस्था भी अब कम की जा सकती है।
विरोध की गूँज और राजनीतिक विद्वेष के आरोप
जब पहली बार बंगला खाली करने का आदेश आया था, तब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे सहजता से स्वीकार नहीं किया था। राजद के प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल सहित कई बड़े नेताओं ने (Political Conflict in Bihar) इस कदम का कड़ा विरोध किया था। पार्टी ने इसे सत्ताधारी दल द्वारा राजनीतिक विद्वेष की भावना से प्रेरित कार्रवाई बताया था। राजद समर्थकों का तर्क था कि लालू परिवार को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, लेकिन अब सामान की शिफ्टिंग शुरू होने के बाद यह साफ है कि कानूनी लड़ाई के बजाय परिवार ने वैकल्पिक आवास की ओर बढ़ने का फैसला किया है।
हार्डिंग रोड पर नया आशियाना और नई शुरुआत
सरकार ने ’10 सर्कुलर रोड’ के बदले लालू परिवार के लिए हार्डिंग रोड पर एक नया सरकारी आवास आवंटित किया है। हालांकि, यह नया आवास (New Residential Allocation) पुराने बंगले के मुकाबले छोटा बताया जा रहा है, लेकिन लालू-राबड़ी परिवार के प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए इसे सुसज्जित किया गया है। माना जा रहा है कि शिफ्टिंग की प्रक्रिया अगले कुछ दिनों में पूरी हो जाएगी, जिसके बाद राजद प्रमुख और राबड़ी देवी अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत इसी नए पते से करेंगे।
महुआबाग के निजी बंगले में शिफ्ट होने की तैयारी
राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि लालू-राबड़ी परिवार भविष्य में किसी सरकारी आवास के बजाय अपने निजी आवास में रहना पसंद कर सकता है। पटना के महुआबाग इलाके में (Private Property Development) लालू परिवार का एक आलीशान निजी बंगला लगभग बनकर तैयार है। सूत्रों की मानें तो भविष्य की अनिश्चितताओं और बार-बार होने वाली बंगला पॉलिटिक्स से बचने के लिए परिवार लंबे समय के लिए अपने उसी निजी घर को स्थायी ठिकाना बना सकता है। फिलहाल, सारा ध्यान वर्तमान शिफ्टिंग और नए सरकारी आवास पर केंद्रित है।
’10 सर्कुलर’ की कहानी: सत्ता और संघर्ष का संगम
साल 2006 से लेकर 2025 तक का सफर इस बंगले के लिए बहुत उतार-चढ़ाव भरा रहा है। यहाँ से लालू यादव ने कई रैलियों का शंखनाद किया और यहीं से तेजस्वी यादव ने (Emergence of New Leadership) बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई। इस बंगले के बरामदे में बिछने वाली कुर्सियां और कार्यकर्ताओं का हुजूम अब केवल यादों में रह जाएगा। 10 सर्कुलर रोड अब जल्द ही किसी नए मंत्री या अधिकारी के नाम आवंटित कर दिया जाएगा, लेकिन इसकी पहचान हमेशा लालू परिवार के सबसे लंबे प्रवास वाले घर के रूप में बनी रहेगी।
बिहार की बदलती सियासत और बंगले की जंग का अंत
बिहार में सरकारी आवासों को लेकर चलने वाली यह जंग अब अपने आखिरी पड़ाव पर है। जहाँ एक ओर नीतीश सरकार सुशासन और नियमों के पालन की (Governance and Administration Reform) दुहाई दे रही है, वहीं विपक्ष इसे विपक्षी नेताओं को नीचा दिखाने का जरिया बता रहा है। बहरहाल, सामान से लदे वाहनों का बाहर निकलना इस बात का संकेत है कि अब लालू परिवार ने नई परिस्थितियों के साथ समझौता कर लिया है। अब देखना यह होगा कि इस नए पते से राजद आगामी चुनावों के लिए किस प्रकार की रणनीति तैयार करती है।



