PoliticsUpdate – विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवारों के ऐलान से बढ़ी सियासी सरगर्मी…
PoliticsUpdate – बिहार विधान परिषद की आगामी चुनावी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने अपने हिस्से की सीट के लिए उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। पार्टी ने अपने कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी को मैदान में उतारने का फैसला किया है। इस निर्णय के साथ ही राज्य की राजनीतिक तस्वीर में नए समीकरणों पर चर्चा शुरू हो गई है।

लोजपा (रामविलास) के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव अब्दुल खालिक ने बताया कि पार्टी के केंद्रीय संसदीय बोर्ड ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद अशरफ अंसारी के नाम पर सहमति जताई। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि संगठनात्मक अनुभव और राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए वे इस चुनाव के लिए उपयुक्त उम्मीदवार हैं।
एनडीए ने लगभग सभी सीटों पर तय किए प्रत्याशी
बिहार विधान परिषद की रिक्त हो रही सीटों के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अपनी तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। भारतीय जनता पार्टी ने जिन नामों की घोषणा की है, उनमें भोजपुरी फिल्म अभिनेता और गायक पवन सिंह, संजय मयूख, शीला मंडल और अनिल ठाकुर शामिल हैं।
वहीं जनता दल (यूनाइटेड) ने भी अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। पार्टी ने निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद को चुनावी मैदान में उतारा है। गठबंधन की ओर से अन्य सहयोगी दलों के हिस्से की सीटों पर भी उम्मीदवारों की घोषणा की प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है।
महागठबंधन में नामों को लेकर जारी मंथन
दूसरी ओर विपक्षी महागठबंधन अभी तक अपने सभी उम्मीदवारों के नाम तय नहीं कर पाया है। नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने में अब सीमित समय बचा है, लेकिन अंतिम निर्णय को लेकर चर्चा जारी है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, विपक्षी खेमे में संभावित उम्मीदवारों को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।
बताया जा रहा है कि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव एक विशेष सामाजिक वर्ग से आने वाले नेता को मौका देने के पक्ष में हैं, जबकि गठबंधन के भीतर कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं की अलग प्राथमिकताएं हैं। इसी कारण उम्मीदवार चयन को लेकर अंतिम सहमति बनने में समय लग रहा है।
एक सीट पर दिलचस्प मुकाबले के संकेत
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार विधान परिषद चुनाव में कम से कम एक सीट पर मुकाबला काफी रोचक हो सकता है। एनडीए की ओर से अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद विपक्ष की रणनीति पर भी नजरें टिक गई हैं।
चुनावी गणित और सामाजिक समीकरणों को देखते हुए दोनों पक्ष अपने-अपने उम्मीदवारों के चयन में सावधानी बरत रहे हैं। यही वजह है कि अंतिम क्षण तक उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा जारी रहने की संभावना है।
पिछले चुनाव की यादें भी हुईं ताजा
राजनीतिक गलियारों में इस चुनाव की तुलना पूर्व में हुए कुछ महत्वपूर्ण चुनावों से भी की जा रही है, जहां अंतिम चरण तक मुकाबले की तस्वीर स्पष्ट नहीं हो सकी थी। इस बार भी संख्या बल और रणनीतिक समर्थन की भूमिका अहम मानी जा रही है।
फिलहाल सभी दलों की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और उम्मीदवारों की अंतिम सूची पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट हो जाएगा कि विधान परिषद की इन सीटों पर किस प्रकार का राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलेगा।