Panchayat Crisis – जहानाबाद में 11 समिति सदस्यों का सामूहिक इस्तीफा देने का फैसला
Panchayat Crisis – जहानाबाद जिले के रतनी फरीदपुर प्रखंड में उस समय प्रशासनिक और राजनीतिक माहौल गरमा गया, जब पंचायत समिति के 11 सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए जिला पदाधिकारी कार्यालय पहुंचकर विरोध दर्ज कराया। जनप्रतिनिधियों ने प्रखंड प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी भूमिका को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय विकास प्रभावित हो रहा है। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है और मामला चर्चा के केंद्र में आ गया है।

प्रखंड प्रशासन पर मनमानी के आरोप
पंचायत समिति के सदस्यों ने स्पष्ट तौर पर आरोप लगाया कि प्रखंड स्तर पर विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना है कि कई महत्वपूर्ण फैसले बिना उनकी जानकारी और सहमति के लिए जा रहे हैं। इससे न केवल जनप्रतिनिधियों की भूमिका सीमित हो रही है, बल्कि योजनाओं के सही क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सदस्यों का कहना है कि वे लगातार इस मुद्दे को उठाते रहे, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।
निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने का आरोप
समिति के सदस्यों का कहना है कि विकास कार्यों को लेकर होने वाली बैठकों और योजनाओं में उन्हें शामिल नहीं किया जाता। कई बार उन्होंने अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। उनका मानना है कि इस तरह की कार्यशैली से जनप्रतिनिधियों का महत्व कम हो जाता है और जनता के हितों की अनदेखी होती है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने सामूहिक इस्तीफे का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया।
सख्त कदम उठाने की चेतावनी
जिला पदाधिकारी के समक्ष अपनी बात रखते हुए पंचायत समिति सदस्यों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उनकी शिकायतों का समाधान नहीं हुआ, तो वे आगे और कड़े कदम उठाने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि वे केवल पद पर बने रहने के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास और जनता की आवाज उठाने के लिए चुने गए हैं। यदि उनकी भूमिका ही सीमित कर दी जाए, तो पद पर बने रहने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।
प्रशासन ने दिया नियमों का हवाला
दूसरी ओर, प्रखंड विकास पदाधिकारी आकांक्षा सिन्हा ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पंचायत समिति की बैठक के लिए न्यूनतम 13 सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होती है। संबंधित बैठक में पर्याप्त संख्या में सदस्य मौजूद नहीं थे, जिसके कारण बैठक को स्थगित करना पड़ा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत ही संचालित की जा रही हैं।
निष्पक्ष जांच का भरोसा
प्रशासन की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि समिति सदस्यों द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों की बात सुनने के बाद ही उचित निर्णय लिया जाएगा। इस मामले में जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा, बल्कि तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
लंबे समय से चल रही नाराजगी आई सामने
इस्तीफा देने की चेतावनी देने वाले सदस्यों ने यह भी बताया कि पिछले कई महीनों से वे विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं को लेकर आवाज उठा रहे थे। उनका कहना है कि कई बार अधिकारियों से मिलकर अपनी बात रखी गई, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। ऐसे में उन्होंने यह निर्णय लिया कि यदि उनकी बातों को लगातार नजरअंदाज किया जाता रहा, तो सामूहिक इस्तीफा ही अंतिम विकल्प रह जाएगा।



