HospitalFire – मुजफ्फरपुर अस्पताल अग्निकांड में कई परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़
HospitalFire – मुजफ्फरपुर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र स्थित प्रसाद अस्पताल में आईसीयू के भीतर लगी भीषण आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। इस दर्दनाक घटना में कई मरीजों की जान चली गई, जिसके बाद अस्पताल परिसर से लेकर मृतकों के गांवों तक शोक का माहौल है। हादसे के बाद परिजन अपने प्रियजनों को खोने के गम में डूबे हुए हैं और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतकों में मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों के मरीज शामिल हैं।

सड़क दुर्घटना के बाद इलाज करा रहे कर्मचारी की मौत
हादसे में जान गंवाने वालों में औराई क्षेत्र के रतनपुर गांव निवासी 30 वर्षीय शशांक कुमार भी शामिल हैं। वह पटना में वित्त विभाग में लिपिक के पद पर कार्यरत थे। परिवार के मुताबिक हाल ही में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल होने के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उनके सिर की सर्जरी सफलतापूर्वक हुई थी और स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन आईसीयू में आग लगने की घटना ने परिवार की सारी उम्मीदें खत्म कर दीं। परिजन इस घटना को बेहद दुखद बताते हुए अस्पताल प्रबंधन की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
बुजुर्ग किसान भी नहीं बच सके
मीनापुर प्रखंड के गोरिगामा गांव निवासी 76 वर्षीय कृष्ण नंदन सिंह भी इस हादसे का शिकार बने। वह लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे और उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती थे। परिजनों का कहना है कि घटना के बाद उन्हें समय पर स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। बाद में जब वे अस्पताल से जुड़े अन्य चिकित्सा केंद्र पहुंचे, तब उन्हें उनकी मृत्यु की सूचना मिली। परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
डायलिसिस के लिए भर्ती महिला की गई जान
मोतीपुर क्षेत्र के बिस्तौलिया गांव की रहने वाली 62 वर्षीय गीता देवी भी आग की चपेट में आने से नहीं बच सकीं। वह लंबे समय से किडनी संबंधी बीमारी का उपचार करा रही थीं और नियमित रूप से डायलिसिस के लिए अस्पताल आती थीं। परिजनों के अनुसार इलाज की प्रक्रिया चल रही थी, तभी यह हादसा हो गया। परिवार का कहना है कि अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम होते तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी।
ब्रेन सर्जरी के बाद भर्ती मरीज की मौत
सीतामढ़ी जिले के 57 वर्षीय उदय कुमार भी मृतकों में शामिल हैं। परिवार के अनुसार कुछ समय पहले उनकी मस्तिष्क संबंधी सर्जरी हुई थी और चिकित्सकीय सलाह पर उन्हें आईसीयू में रखा गया था। आग लगने की सूचना मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उनके परिवार का आरोप है कि आपात स्थिति में मरीजों को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था पर्याप्त नहीं थी।
ऑपरेशन के बाद स्वास्थ्य लाभ की उम्मीद थी
सीतामढ़ी के रूपौली गांव निवासी 60 वर्षीय चंचला वर्मा का भी इस हादसे में निधन हो गया। हाल ही में पैर में चोट लगने के बाद उनका ऑपरेशन किया गया था और उन्हें निगरानी के लिए आईसीयू में रखा गया था। परिवार को उम्मीद थी कि उपचार के बाद वह जल्द घर लौट आएंगी, लेकिन आग की घटना ने यह उम्मीद छीन ली। परिजनों का कहना है कि यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो सकता।
हादसे के बाद उठ रहे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
घटना के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। उनका आरोप है कि अस्पताल में आग से बचाव और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं थीं। कई परिवारों का मानना है कि यदि समय पर राहत और बचाव कार्य प्रभावी ढंग से किया जाता तो कुछ मरीजों की जान बचाई जा सकती थी।
जांच जारी, न्याय की मांग तेज
प्रशासन और संबंधित एजेंसियां आग लगने के कारणों की जांच में जुटी हैं। हादसे के पीछे की परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों के पालन की भी समीक्षा की जा रही है। दूसरी ओर, पीड़ित परिवार इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।