बिहार

FuneralSchemeScam – मोतिहारी में अंत्येष्टि सहायता राशि में गड़बड़ी का मामला उजागर

FuneralSchemeScam – बिहार के मोतिहारी जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गरीब परिवारों को अंतिम संस्कार के लिए दी जाने वाली आर्थिक सहायता में कथित अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, योजना के तहत मिलने वाली राशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने के बजाय एक ही बैंक खाते में बार-बार जमा की जाती रही।

दरमाहा गांव में सामने आया मामला

यह मामला कल्याणपुर प्रखंड के दरमाहा गांव से जुड़ा हुआ है। यहां कबीर अंत्येष्टि योजना के अंतर्गत पात्र लोगों को मिलने वाली 3000 रुपये की सहायता राशि में गड़बड़ी की बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि राजपुर स्थित स्टेट बैंक के एक खाते, जिसके अंतिम अंक 430 बताए जाते हैं, में इस योजना की रकम एक साल के भीतर कई बार भेजी गई। यह संख्या इतनी अधिक है कि इसे सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा मानना मुश्किल हो रहा है।

सरकारी पोर्टल पर दर्ज हैं भुगतान के विवरण

इस पूरे प्रकरण की एक अहम बात यह है कि भुगतान से जुड़ी सभी जानकारियां सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हैं। रिपोर्ट में लाभार्थियों के नाम, बैंक खाता संख्या, IFSC कोड, UTR नंबर और ट्रांजैक्शन की तारीखें स्पष्ट रूप से दर्ज हैं। इसके बावजूद लंबे समय तक इस गड़बड़ी पर ध्यान नहीं दिया जाना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।

लापरवाही या मिलीभगत की आशंका

अब इस मामले को लेकर कई तरह की आशंकाएं सामने आ रही हैं। एक ओर इसे अधिकारियों की लापरवाही माना जा रहा है, तो दूसरी ओर सुनियोजित तरीके से की गई गड़बड़ी की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। नियमों के अनुसार, योजना की राशि सीधे लाभार्थी के खाते में जानी चाहिए, लेकिन जब बार-बार एक ही खाते में भुगतान हुआ, तो प्रक्रिया में गंभीर चूक या संभावित मिलीभगत की बात उठना स्वाभाविक है।

प्रशासन ने शुरू की जांच प्रक्रिया

मामला सार्वजनिक होने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हुआ है। उप विकास आयुक्त (डीडीसी) ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश जारी किए हैं। साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर दस्तावेजों की जांच की जा रही है और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।

व्यवस्था की पारदर्शिता पर उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी योजनाओं की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर उन योजनाओं पर, जो समाज के सबसे कमजोर वर्ग के लिए बनाई जाती हैं। यह भी सवाल उठ रहा है कि जब सभी आंकड़े पोर्टल पर उपलब्ध थे, तब समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच के बाद क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और जिम्मेदारों की पहचान कैसे होती है।

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