Fraud – सरकारी नौकरी का झांसा देकर वसूली की कोशिश, हिरासत में लिय गए दो संदिग्ध
Fraud – बिहार के गया जिले के बोधगया में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर युवाओं से कथित ठगी का मामला सामने आया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में नियुक्ति का दावा कर अभ्यर्थियों से धन लेने की कोशिश करने वाले दो संदिग्ध युवकों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। प्रारंभिक जांच के दौरान उनके पास से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा संदिग्ध पहचान पत्र भी मिला है, जिसकी सत्यता की जांच की जा रही है।

नौकरी का भरोसा देकर मांगा गया पंजीकरण शुल्क
पुलिस के अनुसार, कैमूर जिले का एक युवक, जो फिलहाल महाराष्ट्र के कल्याण स्थित एक निजी कंपनी में कार्यरत है, सरकारी नौकरी की तलाश में था। इसी दौरान एक निजी एजेंसी ने उसे बोधगया के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में फाइल मेंटेनेंस के पद पर नियुक्ति दिलाने का भरोसा दिया। एजेंसी ने पंजीकरण के नाम पर 1,160 रुपये जमा कराए और यह भी कहा कि नियुक्ति मिलने के बाद 35 हजार रुपये अतिरिक्त देने होंगे। युवक को हर महीने 22 हजार रुपये वेतन मिलने का दावा भी किया गया।
अस्पताल पहुंचने पर सामने आई सच्चाई
निर्धारित तारीख पर युवक जॉइनिंग के लिए अस्पताल पहुंचा। वहां मौजूद कर्मचारियों से बातचीत के दौरान उसे भर्ती प्रक्रिया को लेकर संदेह हुआ। जब उसने अस्पताल प्रशासन से जानकारी ली तो पता चला कि संबंधित पद के लिए कोई भर्ती प्रक्रिया चल ही नहीं रही है। इसके बाद युवक ने मामले की सूचना तुरंत डायल-112 पुलिस को दी।
पुलिस कार्रवाई में दो लोग हिरासत में
सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और अस्पताल परिसर से दो संदिग्ध युवकों को हिरासत में ले लिया। तलाशी के दौरान उनके पास से बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग के नाम का एक संदिग्ध पहचान पत्र बरामद हुआ। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह दस्तावेज असली है या फर्जी और इसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था।
संगठित गिरोह की आशंका पर जांच जारी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि हिरासत में लिए गए दोनों युवक मधेपुरा जिले के बाभनगामा गांव के निवासी हैं। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि दोनों किसी बड़े फर्जी भर्ती नेटवर्क का हिस्सा हैं या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस तरीके से अब तक कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया या उनसे धन की वसूली की गई।
निजी एजेंसी की भूमिका भी जांच के घेरे में
पुलिस ने इस पूरे मामले में संबंधित निजी एजेंसी की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा है। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में संगठित धोखाधड़ी या फर्जी भर्ती रैकेट की पुष्टि होती है तो इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने के बाद आरोपियों पर धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाएगा।
पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या कार्यालय से उसकी पुष्टि अवश्य करें। किसी भी भर्ती प्रक्रिया में धन जमा करने से पहले उसकी वैधता की जांच करना आवश्यक है, ताकि इस तरह की धोखाधड़ी से बचा जा सके।