बिहार

ChiefJustice – जस्टिस मीनाक्षी मदन राय ने संभाली पटना हाईकोर्ट की कमान

ChiefJustice – पटना हाईकोर्ट को शुक्रवार को नया नेतृत्व मिला, जब वरिष्ठ न्यायाधीश जस्टिस मीनाक्षी मदन राय ने मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ग्रहण की। राजधानी पटना स्थित लोकभवन में आयोजित समारोह में बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। शपथ ग्रहण के बाद वह सीधे पटना हाईकोर्ट पहुंचीं, जहां उन्होंने औपचारिक रूप से अपना कार्यभार संभाला। इस अवसर पर न्यायपालिका और प्रशासन से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पटना हाईकोर्ट की 48वीं मुख्य न्यायाधीश बनीं

जस्टिस मीनाक्षी मदन राय पटना हाईकोर्ट की 48वीं मुख्य न्यायाधीश के रूप में जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनके पदभार ग्रहण करने के साथ ही उच्च न्यायालय को नया नेतृत्व मिला है। इससे पहले यह दायित्व जस्टिस संगम कुमार साहू निभा रहे थे, जो 4 जून को सेवानिवृत्त हो गए थे। मुख्य न्यायाधीश के स्वागत में हाईकोर्ट परिसर में एक विशेष सम्मान कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।

शिक्षा और विधि क्षेत्र में मजबूत पृष्ठभूमि

जस्टिस मीनाक्षी मदन राय का जन्म 12 जुलाई 1964 को सिक्किम में हुआ था। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कैंपस लॉ सेंटर से विधि की डिग्री हासिल कर कानूनी क्षेत्र में अपना करियर शुरू किया। उनकी शैक्षणिक और पेशेवर यात्रा न्यायिक सेवा में लंबे अनुभव की गवाही देती है।

वकालत से न्यायिक सेवा तक का सफर

वर्ष 1990 में उन्होंने दिल्ली बार से अपने विधिक करियर की शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में कार्य किया। कानूनी पेशे में सक्रिय रहते हुए उन्होंने सिक्किम न्यायिक सेवा परीक्षा भी उत्तीर्ण की और सिविल जज के रूप में न्यायिक सेवा में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने विभिन्न न्यायिक पदों पर कार्य करते हुए व्यापक अनुभव अर्जित किया।

कॉलेजियम की सिफारिश के बाद मिली नियुक्ति

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 22 मई को जस्टिस मीनाक्षी मदन राय के नाम की अनुशंसा मुख्य न्यायाधीश पद के लिए केंद्र सरकार को भेजी थी। सिफारिश पर विचार के बाद केंद्र सरकार ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी प्रदान की। इसके बाद उनकी नियुक्ति की आधिकारिक अधिसूचना जारी की गई और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया पूरी हुई।

सीमित कार्यकाल में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी

मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल अपेक्षाकृत छोटा रहेगा, क्योंकि वह आगामी 12 जुलाई को सेवानिवृत्त होने वाली हैं। इसके बावजूद न्यायिक प्रशासन और लंबित मामलों के निपटारे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर उनकी भूमिका अहम मानी जा रही है। न्यायिक क्षेत्र में उनके अनुभव और प्रशासनिक समझ को देखते हुए उनसे कई महत्वपूर्ण निर्णयों और पहलों की अपेक्षा की जा रही है।

पटना हाईकोर्ट में नए नेतृत्व के आगमन को न्यायिक व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। न्यायपालिका से जुड़े लोग उम्मीद जता रहे हैं कि उनके कार्यकाल में अदालत की प्रशासनिक और न्यायिक प्रक्रियाओं को और मजबूती मिलेगी।

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