Bribery – पश्चिम चंपारण में 15 हजार रुपये लेते गिरफ्तार हुआ पंचायत सचिव
Bribery– बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एक पंचायत सचिव को कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नरकटियागंज प्रखंड की मलदहिया पंचायत में आयोजित एक पंचायत शिविर के दौरान की गई। गिरफ्तार आरोपी की पहचान पंचायत सचिव शंकर प्रसाद के रूप में हुई है।

भुगतान के बदले रिश्वत मांगने का आरोप
निगरानी विभाग के अनुसार, मलदहिया पंचायत निवासी परवेज कौशर ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पंचायत में कराए गए मरम्मत कार्य का माप पुस्तिका (एमबी) तैयार होने के बावजूद करीब 78 हजार रुपये का भुगतान लंबे समय से लंबित था। आरोप है कि भुगतान जारी करने के लिए पंचायत सचिव ने 28 हजार रुपये रिश्वत की मांग की थी।
शिकायत के बाद बिछाया गया जाल
शिकायतकर्ता का कहना था कि कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद भुगतान नहीं हुआ। बाद में कथित रूप से 15 हजार रुपये पहली किस्त के रूप में देने पर सहमति बनी। इसके बाद परवेज कौशर ने पूरे मामले की लिखित शिकायत निगरानी अन्वेषण ब्यूरो को सौंपी। प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने पर विभाग ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई की तैयारी की।
रिश्वत लेते ही टीम ने किया गिरफ्तार
पूर्व निर्धारित योजना के तहत शिकायतकर्ता बुधवार को पंचायत शिविर पहुंचा। जैसे ही उसने पंचायत सचिव को 15 हजार रुपये दिए, पहले से मौके पर मौजूद निगरानी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को रंगे हाथ पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद अधिकारियों ने घटनास्थल पर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की और आरोपी को आगे की पूछताछ के लिए अपने साथ ले गए।
भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत होगी कार्रवाई
निगरानी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस प्रकरण में अन्य लोग भी किसी रूप में शामिल थे। जांच पूरी होने के बाद आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
पारदर्शिता को लेकर फिर उठे सवाल
इस कार्रवाई के बाद पंचायत स्तर पर सरकारी योजनाओं के भुगतान की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों में नियमित निगरानी और समय-समय पर कार्रवाई होती रहे, तो सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।