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LawUpdate – महाराष्ट्र में धर्मांतरण रोकने वाला विधेयक मंजूरी के करीब

LawUpdate – महाराष्ट्र में कथित रूप से जबरन या भ्रामक तरीके से होने वाले धर्मांतरण को रोकने के उद्देश्य से लाया गया ‘धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2026’ अब कानून बनने की अंतिम प्रक्रिया में पहुंच चुका है। राज्य विधानसभा के बाद अब विधान परिषद ने भी इस विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही यह प्रस्ताव अब राज्यपाल के अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसके लागू होने का रास्ता साफ हो जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कानून ऐसे मामलों पर नियंत्रण के लिए लाया गया है, जहां धर्म परिवर्तन में दबाव या छल का आरोप लगता रहा है।

दोनों सदनों से मिली स्वीकृति
इस विधेयक को पहले विधानसभा में पारित किया गया था और उसके अगले ही दिन इसे विधान परिषद में भी मंजूरी मिल गई। गृह राज्य मंत्री पंकज भोयर ने इसे सदन में प्रस्तुत किया था। सरकार के मुताबिक, यह कानून समाज में पारदर्शिता बनाए रखने और लोगों को किसी भी प्रकार के दबाव या धोखे से बचाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। दोनों सदनों से पारित होने के बाद अब यह अंतिम औपचारिकता के तौर पर राज्यपाल के पास भेजा गया है।

कड़े दंड और जुर्माने का प्रावधान
विधेयक में धर्मांतरण से जुड़े अपराधों के लिए सख्त सजा तय की गई है। यदि कोई व्यक्ति विवाह का प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराता है, तो उसके लिए सात साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक का जुर्माना निर्धारित किया गया है। वहीं, यदि यह मामला महिला, नाबालिग या अनुसूचित जाति एवं जनजाति से जुड़े व्यक्ति के साथ होता है, तो जुर्माने की राशि बढ़ाकर पांच लाख रुपये तक की जा सकती है। सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में भी इसी तरह की सजा का प्रावधान रखा गया है, जबकि बार-बार अपराध करने वालों के लिए सजा की अवधि दस साल तक बढ़ाई जा सकती है।

धर्म परिवर्तन की प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर
इस कानून में केवल दंडात्मक प्रावधान ही नहीं, बल्कि प्रक्रिया को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने के लिए भी नियम तय किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से अपना धर्म बदलना चाहता है, तो उसे कम से कम 60 दिन पहले संबंधित प्रशासनिक अधिकारी को इसकी सूचना देनी होगी। धर्म परिवर्तन के बाद भी संबंधित व्यक्ति और संस्था को इसकी जानकारी प्रशासन को देनी अनिवार्य होगी। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश की गई है कि हर प्रक्रिया दस्तावेजी रूप से दर्ज हो।

जांच और निगरानी की व्यवस्था तय
विधेयक में यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे मामलों की जांच केवल पुलिस के सब-इंस्पेक्टर या उससे वरिष्ठ अधिकारी द्वारा ही की जाएगी। इसका उद्देश्य जांच प्रक्रिया को अधिक जिम्मेदार और व्यवस्थित बनाना है। इसके अलावा, सरकार ने यह भी कहा है कि जिन लोगों को इस तरह की घटनाओं से नुकसान हुआ है, उनके पुनर्वास और बच्चों की देखभाल के लिए सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

कानून लागू होने के बाद बढ़ेगी जवाबदेही
सरकार का मानना है कि इस कानून के लागू होने के बाद धर्म परिवर्तन से जुड़े मामलों में जवाबदेही बढ़ेगी और किसी भी प्रकार के अवैध या दबावपूर्ण प्रयासों पर रोक लगेगी। हालांकि, इस विषय पर विभिन्न पक्षों के अलग-अलग विचार भी सामने आ सकते हैं, लेकिन फिलहाल राज्य में इस विधेयक को लेकर प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है।

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