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VarunChakravarthy – खराब लेंथ से बढ़ा दबाव, पूर्व स्पिनर चावला ने दी अहम सलाह

VarunChakravarthy – टी20 टूर्नामेंट के अहम मुकाबलों में भारतीय टीम के रहस्यमयी स्पिनर वरुण चक्रवर्ती का प्रदर्शन चर्चा का विषय बना हुआ है। पिछले दो मैचों में उनकी गेंदबाजी उम्मीद के मुताबिक असरदार नहीं रही, जिसके बाद क्रिकेट विशेषज्ञों के बीच टीम संयोजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के खिलाफ खेले गए मुकाबलों में चक्रवर्ती अपेक्षित नियंत्रण नहीं दिखा पाए, जिससे विपक्षी बल्लेबाजों को रन बनाने का मौका मिला।

पूर्व भारतीय स्पिनर पीयूष चावला का मानना है कि हाल के मैचों में चक्रवर्ती की गेंदबाजी की लंबाई में निरंतरता की कमी रही। उनके अनुसार जब कोई गेंदबाज अपनी स्वाभाविक लंबाई से भटकता है तो बल्लेबाजों के लिए उसे खेलना आसान हो जाता है।

हाल के मैचों में महंगे साबित हुए चक्रवर्ती

हालिया मुकाबलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो चक्रवर्ती को काफी रन खर्च करने पड़े। वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने चार ओवर में 40 रन देकर एक विकेट लिया। इसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल मुकाबले में उनकी गेंदबाजी और महंगी रही, जहां उन्होंने 64 रन खर्च करते हुए केवल एक विकेट हासिल किया।

इन आंकड़ों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या फाइनल मुकाबले में टीम प्रबंधन उन्हें अंतिम एकादश में बनाए रखेगा या फिर किसी दूसरे स्पिनर को मौका दिया जाएगा। कई विशेषज्ञों का मानना है कि कुलदीप यादव एक विकल्प के रूप में टीम में शामिल हो सकते हैं।

पीयूष चावला ने बताई गेंदबाजी की मुख्य समस्या

क्रिकेट विश्लेषण के दौरान पीयूष चावला ने कहा कि कभी-कभी दबाव या ज्यादा प्रयोग करने की कोशिश में गेंदबाज अपनी मूल रणनीति से हट जाते हैं। उनके मुताबिक चक्रवर्ती के साथ भी हाल के मैचों में यही स्थिति देखने को मिली है।

चावला ने कहा कि चक्रवर्ती की सबसे बड़ी ताकत उनकी वह गेंदबाजी लंबाई है जो बल्लेबाज को असमंजस में डालती है। लेकिन जब वह उस आदर्श लंबाई से हटकर बहुत आगे या बहुत छोटी गेंद फेंकने लगते हैं तो बल्लेबाजों को स्ट्रोक खेलने में आसानी हो जाती है।

स्पिनर के लिए सही लेंथ का महत्व

पूर्व स्पिनर के अनुसार स्पिन गेंदबाज के लिए सही लंबाई बेहद अहम होती है। उन्होंने कहा कि स्पिनर को ऐसी जगह गेंद डालनी चाहिए जहां से गेंद को घुटने की ऊंचाई तक उछाल मिले और बल्लेबाज को आगे या पीछे खेलने को मजबूर होना पड़े।

अगर गेंदबाज तेज गेंदबाजों जैसी लंबाई पर गेंद डालने लगे तो उसका असर कम हो जाता है। चावला का कहना है कि जब स्पिनर अपनी प्राकृतिक लंबाई पर गेंदबाजी करता है तो बल्लेबाज के लिए शॉट खेलना मुश्किल हो जाता है।

गति और विविधता चक्रवर्ती की ताकत

चावला ने यह भी कहा कि चक्रवर्ती की गेंदबाजी की गति और विविधता उन्हें खतरनाक बनाती है। उनकी गेंदें अक्सर बल्लेबाज के लिए पढ़ना आसान नहीं होतीं, खासकर तब जब बल्लेबाज को गेंद हाथ से निकलते समय उसकी दिशा का अंदाजा नहीं लग पाता।

लेकिन अगर लेंथ में गलती हो जाए और पिच से ज्यादा मदद न मिले तो बल्लेबाजों को रन बनाने का मौका मिल जाता है। यही कारण है कि पिछले कुछ मुकाबलों में उनके खिलाफ रन तेजी से बने।

फाइनल मुकाबले से पहले चयन पर नजर

अब सबकी नजर आगामी फाइनल मुकाबले पर टिकी है, जहां भारत का सामना न्यूजीलैंड से होना है। टीम प्रबंधन को यह फैसला करना होगा कि वह चक्रवर्ती पर भरोसा कायम रखे या फिर रणनीतिक बदलाव करते हुए कुलदीप यादव को मौका दे।

क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े मुकाबलों में गेंदबाजों की सटीकता और आत्मविश्वास बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि टीम किस संयोजन के साथ मैदान में उतरती है।

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