JDUvsRJD – चुनावी चंदे पर नीरज कुमार के तीखे हुए सवाल
JDUvsRJD – बिहार की राजनीति में एक बार फिर चुनावी चंदे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनावी बांड के जरिए मिले धन को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि जहां जदयू को वर्ष 2005 से अब तक लगभग 23 करोड़ रुपये मिले, वहीं राजद को मात्र 17 महीनों में 85 करोड़ रुपये का चंदा प्राप्त हुआ।

शराब कंपनियों से चंदे पर उठाए सवाल
नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि राजद को मिला बड़ा हिस्सा कथित तौर पर शराब कंपनियों से आया है। उन्होंने कहा कि जब राज्य में शराबबंदी लागू है, तब ऐसी कंपनियों से धन लेना कई सवाल खड़े करता है। उनके मुताबिक, यदि किसी पार्टी को इतनी बड़ी राशि मिली है तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि यह चंदा किन परिस्थितियों में और किस उद्देश्य से लिया गया।
उन्होंने कहा कि चुनावी बांड के माध्यम से धन लेना अपने आप में अपराध नहीं है, लेकिन स्रोत को लेकर पारदर्शिता होना जरूरी है। उनके अनुसार, जनता को यह जानने का अधिकार है कि राजनीतिक दलों को मिलने वाला आर्थिक सहयोग किन संस्थाओं से आ रहा है।
एक कंपनी के आंकड़ों का जिक्र
जदयू प्रवक्ता ने पश्चिम बंगाल की एक कंपनी का उदाहरण देते हुए कहा कि उसकी पूंजी कथित तौर पर लगभग 13 करोड़ 87 लाख रुपये है, जबकि उसने 35 करोड़ रुपये का चुनावी चंदा दिया। उन्होंने इसे असामान्य बताते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में स्पष्टीकरण जरूरी है।
नीरज कुमार ने दोहराया कि उनका उद्देश्य केवल जवाब मांगना है। उन्होंने आरोप लगाया कि सवालों के जवाब देने के बजाय विपक्ष मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रहा है।
विधान परिषद में चुनौती और बयानबाजी
इस दौरान नीरज कुमार ने राजद के एमएलसी सुनील कुमार सिंह को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सदन में शराब की आपूर्ति से जुड़ा दावा करने के बाद अब वह पीछे हटते नजर आ रहे हैं। नीरज कुमार ने कहा कि यदि किसी ने सार्वजनिक रूप से कोई दावा किया है तो उसे उस पर कायम रहना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि कानून के तहत ऐसी किसी भी गतिविधि पर कार्रवाई हो सकती है। उनके बयान में राजनीतिक तल्खी साफ दिखाई दी, जिसमें उन्होंने विपक्षी नेता को अपने आरोपों पर स्पष्ट रुख अपनाने की चुनौती दी।
राजनीतिक माहौल में बढ़ी गर्मी
चुनावी बांड और चंदे के मुद्दे पर बिहार की सियासत में बयानबाजी तेज हो गई है। जदयू और राजद के बीच यह टकराव आने वाले समय में और गहराने के संकेत दे रहा है। हालांकि, राजद की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी फंडिंग का मुद्दा केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय रहा है। ऐसे में राज्य में उठे ये सवाल आने वाले दिनों में और राजनीतिक बहस को जन्म दे सकते हैं। फिलहाल, दोनों दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है और जनता की नजर इस पर टिकी हुई है।



