झारखण्ड

Money Laundering Case – पूर्व मंत्री के परिजनों की याचिका खारिज

Money Laundering Case – झारखंड हाईकोर्ट ने मनी लाउंड्रिंग से जुड़े एक मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व मंत्री कमलेश सिंह के बेटे सूर्य सोनल सिंह, बेटी अंकिता सिंह और दामाद नरेंद्र मोहन सिंह को राहत देने से इनकार कर दिया है। जस्टिस आर. मुखोपाध्याय की अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज मामले को रद्द करने की मांग की गई थी। अदालत के इस आदेश के बाद अब तीनों आरोपितों को नियमित ट्रायल का सामना करना होगा।

आरोपों को रद्द करने की मांग ठुकराई

तीनों आरोपितों ने अदालत में दलील दी थी कि उनके खिलाफ मनी लाउंड्रिंग का मामला बनता ही नहीं है और उन्हें गलत तरीके से आरोपित किया गया है। हालांकि, अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश दस्तावेजों और तर्कों को देखते हुए याचिका स्वीकार नहीं की।

ईडी का आरोप है कि पूर्व मंत्री से जुड़े धन के लेनदेन को छिपाने और घुमाने में परिवार के सदस्यों की भूमिका रही। जांच एजेंसी का कहना है कि वित्तीय लेनदेन के जरिए रकम को अलग-अलग खातों से स्थानांतरित किया गया।

एक दिन में 83 लाख के ट्रांसफर का दावा

जांच एजेंसी के अनुसार, एक ही दिन में लगभग 83 लाख रुपये चार अलग-अलग खातों से होते हुए पूर्व मंत्री तक पहुंचाए गए। ईडी का दावा है कि यह लेनदेन संदिग्ध था और इसका उद्देश्य धन के स्रोत को छिपाना था। इसी आधार पर एजेंसी ने मनी लाउंड्रिंग का मामला दर्ज किया।

इस प्रकरण में 12 अगस्त 2013 को पूर्व मंत्री कमलेश सिंह सहित पांच लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी। आरोपपत्र में उनकी पत्नी मधु सिंह, पुत्र सूर्य सोनल सिंह, पुत्री अंकिता सिंह और दामाद नरेंद्र मोहन सिंह के नाम भी शामिल हैं। अदालत के ताजा आदेश के बाद अब मामले की सुनवाई निचली अदालत में आगे बढ़ेगी।

ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी

हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि तीनों आरोपितों को न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना पड़ेगा। अदालत ने इस स्तर पर हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई ट्रायल कोर्ट में जारी रहेगी।

कानूनी जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में प्रारंभिक स्तर पर याचिका खारिज होने का अर्थ यह नहीं है कि अंतिम निर्णय हो गया है, बल्कि अब साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विस्तृत सुनवाई होगी।

एनकाउंटर मामले में हाईकोर्ट पहुंचा पीड़ित पक्ष

इसी बीच रांची के कोतवाली थाना क्षेत्र में कचहरी चौक पर हुए विवाद और उसके बाद मांडर थाना क्षेत्र में हुई पुलिस फायरिंग का मामला भी न्यायालय पहुंच गया है। गोलीबारी में घायल इश्तियाक के भाई इरशाद अंसारी ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर की है।

याचिका में मांडर क्षेत्र के बास्की गांव में हुई घटना को संदिग्ध बताते हुए इसे कथित फर्जी एनकाउंटर करार दिया गया है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि पुलिस की कार्रवाई निष्पक्ष नहीं थी और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

एसआईटी जांच की मांग

दायर याचिका में हाईकोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल गठित करने की मांग की गई है। इसमें राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक और रांची के एसएसपी को पक्षकार बनाया गया है। साथ ही फायरिंग में शामिल बताए जा रहे अधिकारियों के नाम भी प्रतिवादी के रूप में दर्ज किए गए हैं।

अब यह मामला अदालत के समक्ष विचाराधीन है। आने वाले दिनों में सुनवाई के दौरान अदालत तय करेगी कि जांच किस प्रकार आगे बढ़ेगी।

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