SIRDebate – झारखंड विधानसभा में मतदाता पुनरीक्षण पर तीखी बहस
SIRDebate – झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही राजनीतिक तापमान बढ़ गया। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने नजर आए। मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया पर अलग-अलग दलों ने अपने तर्क रखे और इसे लेकर तीखी बयानबाजी भी हुई।

भाजपा का समर्थन, कांग्रेस पर सवाल
रांची से भाजपा विधायक सीपी सिंह ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन कोई नई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह संवैधानिक व्यवस्था के तहत चुनाव आयोग द्वारा समय-समय पर कराई जाती है। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया देश के विभिन्न राज्यों में चल रही है और झारखंड में भी लागू होगी। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए पूछा कि यदि यह चुनाव आयोग का वैधानिक अधिकार है तो इसका विरोध क्यों किया जा रहा है।
सीपी सिंह ने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। उनका कहना था कि मतदाता सूची को पारदर्शी और अद्यतन रखना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है।
जदयू ने बताया नियमित प्रक्रिया
जमशेदपुर से जदयू विधायक सरयू राय ने भी इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया को चुनौती देने वाले लोग न्यायालय तक गए, लेकिन वहां से उन्हें राहत नहीं मिली। उनके मुताबिक, मतदाता सूची की समीक्षा चुनाव आयोग की नियमित जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से मतदाता सूची में शामिल है तो उसे हटाना आवश्यक है।
राजद ने जताई आपत्ति
दूसरी ओर, राजद विधायक संजय सिंह यादव ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे गरीब और वंचित वर्ग प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुनरीक्षण के नाम पर कई वैध मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी इस मुद्दे को सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह उठाएगी।
नेता प्रतिपक्ष का पक्ष
नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि हर दशक में मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण होता रहा है। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना और सूची को सटीक बनाना है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि कोई व्यक्ति गैरकानूनी तरीके से सूची में दर्ज है तो उसका नाम हटाया जाना चाहिए।
मरांडी ने विपक्षी दलों के विरोध को राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित बताया। उनके अनुसार, यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक व्यवस्था की पारदर्शिता से जुड़ी है।
अन्य मुद्दों पर भी चर्चा
सदन की कार्यवाही से पहले अन्य राजनीतिक मुद्दे भी उठाए गए। आजसू और भाजपा के कुछ विधायकों ने पूर्व मंत्री योगेंद्र साहू और पूर्व विधायक निर्मला देवी की गिरफ्तारी को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने इसे राजनीतिक कदम बताया। वहीं डुमरी से विधायक जयराम महतो ने राज्य लोक सेवा आयोग से संबंधित विषय को प्रमुखता से उठाया।
बजट सत्र के दौरान मतदाता सूची पुनरीक्षण का मुद्दा आने वाले दिनों में भी चर्चा का केंद्र बना रह सकता है। फिलहाल सरकार और विपक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और सदन के भीतर इस पर आगे भी बहस होने की संभावना है।



