PocsoCase – मौनी बाबा की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज
PocsoCase – मिथिला क्षेत्र के चर्चित कथावाचक रामउदित दास, जिन्हें मौनी बाबा के नाम से जाना जाता है, को दरभंगा की विशेष अदालत से राहत नहीं मिली है। व्यवहार न्यायालय की पॉक्सो विशेष अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायालय में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह आदेश विशेष न्यायाधीश प्रतिमा परिहार ने विस्तृत सुनवाई के बाद पारित किया।

क्या है पूरा मामला
मामला महिला थाना कांड संख्या 182/2025 से संबंधित है। एक युवती द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में कथावाचक श्रवण दास उर्फ श्रवण ठाकुर पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में मौनी बाबा को भी सह-आरोपी के रूप में नामजद किया गया है। उनके खिलाफ पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं।
प्राथमिकी में यह भी आरोप है कि पीड़िता के नाबालिग होने के बावजूद उसकी कथित शादी कराई गई। इस संबंध में वीडियो साक्ष्य होने की बात भी जांच में सामने आई है, जिसके आधार पर गंभीर धाराएं लगाई गईं।
दो चरणों में हुई सुनवाई
शुक्रवार को अदालत में इस मामले पर लंबी सुनवाई हुई, जो दो चरणों में चली। अभियोजन पक्ष ने आरोपों की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों का हवाला देते हुए अग्रिम जमानत का विरोध किया। वहीं बचाव पक्ष ने आरोपों को निराधार बताते हुए राहत की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका खारिज कर दी।
मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 351(2), 352, 89, 64(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 4/6 के तहत केस दर्ज है। अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए अग्रिम जमानत देना उचित नहीं है।
मुख्य आरोपी पहले से जेल में
इस प्रकरण के मुख्य आरोपी श्रवण दास को महिला थाना पुलिस ने 17 जनवरी को गिरफ्तार किया था। उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। उनकी जमानत अर्जी भी 5 फरवरी को पॉक्सो अदालत द्वारा खारिज की जा चुकी है। बताया जा रहा है कि श्रवण दास मौनी बाबा के शिष्य हैं और रिश्ते में उनके भतीजे भी बताए जाते हैं।
पीड़िता के बयान और कथित वीडियो साक्ष्य के आधार पर जांच एजेंसियां आगे की कार्रवाई कर रही हैं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच प्रक्रिया जारी है और सभी तथ्यों की विधिवत पड़ताल की जा रही है।
आगे की कानूनी स्थिति
अदालत के आदेश के बाद अब नजर इस बात पर है कि मौनी बाबा निचली अदालत में आत्मसमर्पण करते हैं या फिर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाते हैं। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत परिसर में दोनों पक्षों के समर्थकों की उपस्थिति देखी गई, हालांकि स्थिति शांतिपूर्ण रही।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी और किसी भी पक्ष को विशेष राहत नहीं दी जाएगी। मामले ने क्षेत्र में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है, लेकिन अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही तय होगा।



