उत्तर प्रदेश

UP Byelection:घोसी विधानसभा सीट फिर उपचुनाव के मुहाने पर, सुधाकर सिंह के निधन से खाली हुई सपा की मजबूत सीट

UP Byelection:उत्तर प्रदेश की सियासी सरगर्मी एक बार फिर तेज हो गई है। मऊ जिले की घोसी विधानसभा सीट विधानसभा सचिवालय ने औपचारिक रूप से रिक्त घोषित कर दी है। समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता और मौजूदा विधायक स्वर्गीय सुधाकर सिंह के दुखद निधन के बाद यह सीट खाली हुई है। सचिवालय ने इसके लिए अधिसूचना जारी कर राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सभी विधायकों, मऊ जिलाधिकारी और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सूचित कर दिया है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि इस महत्वपूर्ण सीट पर कब उपचुनाव होगा और कौन बाजी मारेगा।

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छह महीने के अंदर मतदान तय

संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार जब भी किसी विधायक का आकस्मिक निधन होता है या सीट किसी अन्य कारण से रिक्त होती है तो छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना जरूरी होता है। घोसी सीट पर सुधाकर सिंह का निधन 20 नवंबर 2025 को हुआ था, ऐसे में निर्वाचन आयोग को मई 2026 से पहले मतदान कराना होगा। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह उपचुनाव फरवरी-मार्च 2026 में हो सकता है क्योंकि यूपी में मौसम भी उस समय मतदान के लिए अनुकूल रहता है।

सुधाकर सिंह की यादों वाली सीट

स्वर्गीय सुधाकर सिंह घोसी क्षेत्र के बेहद लोकप्रिय नेता थे। 2023 के उपचुनाव में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के दिग्गज नेता दारा सिंह चौहान को करीब 50 हजार से ज्यादा वोटों से हराकर सबको हैरान कर दिया था। उनकी जीत ने सपा को पूर्वांचल में नई ताकत दी थी। लंबी बीमारी के बाद उनका निधन होने से न सिर्फ परिवार बल्कि पूरा घोसी क्षेत्र शोक में डूब गया। लोग आज भी उन्हें याद करते हैं और उनकी कमी खल रही है।

घोसी का सियासी इतिहास बेहद रोचक

पिछले पांच सालों में घोसी विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे ज्यादा चर्चित सीटों में से एक रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में दारा सिंह चौहान ने बीजेपी के टिकट पर भारी मतों से जीत हासिल की थी। लेकिन इसके कुछ ही महीनों बाद उन्होंने बीजेपी छोड़ सपा का दामन थाम लिया और मंत्री भी बने। फिर अचानक सपा से भी इस्तीफा देकर वापस बीजेपी में लौट आए। उनके इस्तीफे के कारण 2023 में उपचुनाव हुआ जिसमें सपा ने सुधाकर सिंह को उतारा और शानदार जीत दर्ज की। अब 2025 में फिर उपचुनाव की नौबत आ गई है। यानी महज चार साल में इस सीट पर तीसरी बार मतदान होने जा रहा है।

सपा बनाम बीजेपी एक बार फिर आमने-सामने

घोसी सीट पर पारंपरिक रूप से सपा और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर रहती आई है। यादव और मुस्लिम वोटों का मजबूत गठजोड़ सपा के पक्ष में रहा है तो दूसरी ओर बीजेपी ने पिछड़ा और दलित वोटों को एकजुट करने की भरपूर कोशिश की है। 2023 में सुधाकर सिंह की जीत ने सपा को मनोवैज्ञानिक बढ़त दी थी। अब उनके नहीं रहने से सपा के लिए यह सीट बचाना चुनौती भरा होगा वहीं बीजेपी इसे जीतकर 2027 के पहले बड़ा संदेश देना चाहेगी।

कौन होगा सपा का नया चेहरा?

सपा में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि सुधाकर सिंह के बाद पार्टी किसे टिकट देगी। स्वर्गीय विधायक का परिवार इस सीट पर दावा कर सकता है या फिर कोई नया युवा चेहरा उतारा जा सकता है। दूसरी तरफ बीजेपी में दारा सिंह चौहान का नाम सबसे आगे चल रहा है। अगर दारा सिंह को फिर टिकट मिलता है तो यह उनके लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल होगा क्योंकि पिछले चुनाव में उन्हें करारी शिकस्त मिली थी।

घोसी का आगामी उपचुनाव सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों की ताकत का इम्तिहान होगा। पूर्वांचल की सियासत में इस सीट का परिणाम दूर तक असर डालेगा।

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