बिहार

RJD National President: तेजस्वी यादव बने राजद के कार्यकारी अध्यक्ष, लालू यादव के साथ संभालेंगे पार्टी की कमान

RJD National President: बिहार की राजनीति में दशकों तक एकछत्र राज करने वाले लालू प्रसाद यादव ने अब अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी तेजस्वी यादव को औपचारिक रूप से बड़ी शक्ति सौंप दी है। रविवार को पटना के एक होटल में आयोजित राजद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तेजस्वी यादव को कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। हालांकि, यह स्पष्ट कर दिया गया है कि लालू यादव का मार्गदर्शन बना रहेगा और वे (Organizational Leadership Transition) के दौर में तेजस्वी को सहयोग प्रदान करेंगे। इस फैसले के बाद तेजस्वी का कद न केवल पार्टी के भीतर बढ़ा है, बल्कि अब वे राष्ट्रीय स्तर पर राजद के नीतिगत फैसलों के लिए पूरी तरह अधिकृत हो गए हैं।

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साल 2028 तक लालू यादव बने रहेंगे मुख्य राष्ट्रीय अध्यक्ष

राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि तेजस्वी को सीधे पूर्णकालिक अध्यक्ष बनाया जा सकता है, लेकिन जानकार सूत्रों का कहना है कि लालू यादव अपना वर्तमान कार्यकाल पूरा करेंगे। लालू प्रसाद यादव साल 2028 तक राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद पर आसीन रहेंगे। इस बीच तेजस्वी यादव कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में (Executive Decision Making) की तमाम जिम्मेदारियां निभाएंगे। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि पार्टी के पुराने और वफादार नेताओं के बीच लालू यादव का प्रभाव बना रहे और नई पीढ़ी को नेतृत्व करने का पर्याप्त अनुभव और समय मिल सके।

विधानसभा चुनाव और टिकट बंटवारे में तेजस्वी का वर्चस्व

भले ही आधिकारिक ताजपोशी अब हुई है, लेकिन पार्टी के भीतर यह संदेश काफी पहले ही जा चुका था कि अब तेजस्वी ही सर्वेसर्वा हैं। पिछले बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर प्रचार की रणनीति तक, सब कुछ तेजस्वी यादव ने ही फाइनल किया था। हालांकि, चुनाव में मिली करारी हार और परिवार के भीतर रोहिणी आचार्या की नाराजगी जैसे प्रकरणों ने (Internal Party Dynamics) को काफी हद तक सार्वजनिक कर दिया था। इन चुनौतियों के बावजूद, लालू यादव ने तेजस्वी की कार्यप्रणाली पर अटूट भरोसा जताते हुए उन्हें कार्यकारी कमान सौंपने का निर्णय लिया।

विदेश यात्रा से वापसी और कोर कमेटी की सक्रियता

तेजस्वी यादव अपनी विदेश यात्रा से लौटने के तुरंत बाद ही चुनावी और सांगठनिक मोड में नजर आए। उन्होंने पटना स्थित अपने आवास पर कोर कमेटी की कई गुप्त बैठकें कीं और पार्टी के भविष्य को लेकर कड़े फैसले लिए। इसी दौरान मकर संक्रांति के अवसर पर तेजप्रताप यादव के ‘दही-चूड़ा भोज’ से उनकी दूरी ने (Political Family Dispute) की खबरों को फिर से हवा दी थी। तेजप्रताप यादव फिलहाल राजद से निष्कासित हैं और अपनी अलग पार्टी चला रहे हैं, ऐसे में तेजस्वी का वहां न जाना यह दर्शाता है कि वे अब पार्टी अनुशासन और इमेज को लेकर बेहद गंभीर हैं।

कार्यकारी से पूर्णकालिक अध्यक्ष बनने तक का सफर

राजनीतिक पंडितों का मानना है कि तेजस्वी यादव की यह नियुक्ति ठीक उसी तर्ज पर है जैसे अन्य बड़े दलों में कार्यकारी अध्यक्षों को बाद में पूर्ण कमान दी जाती है। भविष्य में वह दिन दूर नहीं जब तेजस्वी (Full Fledged Political Leadership) के तौर पर राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष की कुर्सी संभालेंगे। फिलहाल, उनकी प्राथमिकता संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करना और 2028 से पहले खुद को एक परिपक्व राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करना है। लालू यादव के अनुभव और तेजस्वी के आधुनिक विजन का यह मेल राजद के लिए कितना फलदायी होगा, यह आने वाले चुनाव तय करेंगे।

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