बिहार

Bihar Rail Police Controversy: रेल पुलिस की काली करतूत, नदी में लाश फिंकवाते रंगे हाथों पकड़े गए गुर्गे

Bihar Rail Police Controversy: बिहार के बेतिया जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने इंसानियत और कानून, दोनों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। नरकटियागंज के शिकारपुर थाना क्षेत्र में हड़बोड़ा नदी के तट पर सन्नाटे को चीरती हुई एक ऐसी साजिश नाकाम हुई, जिसने पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया है। ग्रामीणों ने (shameful criminal act) को अंजाम देने की कोशिश कर रहे दो लोगों को उस वक्त रंगे हाथों दबोच लिया, जब वे एक महिला के शव को चुपचाप नदी की लहरों के हवाले करने की कोशिश कर रहे थे।

Bihar Rail Police Controversy
Bihar Rail Police Controversy

ग्रामीणों की सतर्कता से बेनकाब हुआ खौफनाक सच

हड़बोड़ा नदी के किनारे जब एक रिक्शा चालक और उसके साथी को संदिग्ध अवस्था में देखा गया, तो स्थानीय लोगों को कुछ अनहोनी का आभास हुआ। जैसे ही ग्रामीणों ने उन्हें घेरा, रिक्शे पर लदी लाश को देखकर सबकी रूह कांप गई। बिना वक्त गंवाए (community vigilante action) के तहत लोगों ने शिकारपुर पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने जब आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की, तो जो सच सामने आया उसने व्यवस्था की जड़ों को हिलाकर रख दिया।

रेल पुलिस पर लगा लाश को ‘ठिकाने’ लगाने का आरोप

पकड़े गए आरोपियों, चमुआ निवासी सूरदास और रामचंद ने जो बयान दिया, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए डरावना है। उन्होंने सीधे तौर पर रेल पुलिस पर आरोप लगाया कि यह शव उन्हें नदी में फेंकने के लिए दिया गया था। उनके अनुसार, (allegations against railway police) की गंभीरता इस बात से बढ़ जाती है कि उन्होंने प्रेम कुमार नामक एक रेल पुलिस कर्मी का नाम लिया है। आरोपियों का दावा है कि पुलिसकर्मी ने ही उन्हें पैसे या निर्देश देकर शव को गायब करने का जिम्मा सौंपा था।

मृतका की पहचान और स्टेशन परिसर का रहस्य

आरोपियों के बयान के मुताबिक, मृत महिला मोतिहारी के चइलहा गांव की तेतरी देवी थी, जो अक्सर स्टेशन परिसर के आसपास ही रहा करती थी। हालांकि, रेल पुलिस अब इस दावे को धुंधला करने में जुटी है। पुलिसिया थ्योरी में (victim identification process) को उलझाते हुए मृतका को महज एक अज्ञात भिखारी बताया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि अगर वह केवल एक बेसहारा महिला थी, तो उसकी मौत के बाद कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के बजाय उसे कचरे की तरह नदी में फेंकने की नौबत क्यों आई?

खाकी के रसूख और कानून की धज्जियां

शिकारपुर थाना प्रभारी ज्वाला कुमार सिंह ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसआई जयभगवान कुमार के नेतृत्व में टीम भेजी, जिसने शव को अपने कब्जे में लिया। इस पूरी घटना ने (violation of legal protocols) का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जहां रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं। रेल थाना प्रभारी राजकुमार ने भले ही शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया हो, लेकिन हवा में तैरते सवाल अब भी रेल पुलिस का पीछा कर रहे हैं कि आखिर रेल परिसर में उस महिला की मौत हुई कैसे थी?

उच्च स्तरीय जांच और अधिकारियों की प्रतिक्रिया

इस शर्मनाक मामले के तूल पकड़ने के बाद रेल एसपी वीणा कुमारी ने मोर्चा संभाला है और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने रेल डीएसपी को (high level police inquiry) का जिम्मा सौंपते हुए जल्द से जल्द रिपोर्ट पेश करने को कहा है। प्रशासन पर अब भारी दबाव है क्योंकि मामला सीधे तौर पर वर्दीधारी रक्षकों की साख से जुड़ा है। क्या जांच की आंच उन अधिकारियों तक पहुंचेगी जिन्होंने कानून को ताक पर रखकर एक शव की गरिमा को ठेस पहुंचाई?

व्यवस्था के चेहरे पर लगा एक और काला धब्बा

यह घटना केवल एक महिला की मौत का मामला नहीं है, बल्कि यह उस सड़ी-गली व्यवस्था का प्रमाण है जहां गरीबों और बेसहारा लोगों की जान की कोई कीमत नहीं है। रेल परिसर में मौत होना और फिर उसे (unethical body disposal) के जरिए छिपाने की कोशिश करना एक गंभीर अपराध है। अगर पुलिस ही सबूतों को मिटाने और लाशों को लावारिस समझकर ठिकाने लगाने लगेगी, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करेगा? बेतिया की यह घटना प्रशासन की नैतिकता पर एक बहुत बड़ा सवालिया निशान है।

क्या मिलेगा तेतरी देवी को इंसाफ?

फिलहाल पूरा मामला फाइलों और बयानों के बीच घूम रहा है, लेकिन नरकटियागंज की जनता सच जानने को बेताब है। हड़बोड़ा नदी का तट उस जुल्म का गवाह बना है जो शायद कभी सामने ही नहीं आता, अगर ग्रामीण मुस्तैद न होते। अब देखना यह है कि (accountability in law enforcement) सुनिश्चित की जाती है या फिर रेल पुलिस के रसूख के आगे यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। एक बेसहारा महिला की मौत के पीछे छिपे गुनहगारों का बेनकाब होना न्याय व्यवस्था के लिए अनिवार्य है।

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