Moody’s Forecast 2026: रॉकेट रफ्तार से दौड़ रही भारतीय इकोनॉमी, अब हर भारतीय की जेब में होगा सुरक्षा का बीमा कवर
Moody’s Forecast 2026: भारतीय अर्थव्यवस्था इस समय दुनिया के मंच पर अपनी धमक दिखा रही है और वैश्विक रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इस पर अपनी मुहर लगा दी है। मूडीज की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत की विकास दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के 6.5 प्रतिशत के मुकाबले एक बड़ी छलांग है। इस शानदार (Indian GDP growth rate) की वजह से देश के आर्थिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जानकारों का मानना है कि यह आर्थिक विस्तार केवल कागजी आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं और वित्तीय सुरक्षा पर सीधा असर डालने वाला है।

बढ़ती प्रति व्यक्ति आय और खरीदारी की नई ताकत
देश की अर्थव्यवस्था में आ रही इस मजबूती का सबसे बड़ा फायदा औसत घरेलू आय में वृद्धि के रूप में दिख रहा है। आंकड़े बताते हैं कि वित्त वर्ष 2024-25 में प्रति व्यक्ति जीडीपी सालाना आधार पर 8.2 प्रतिशत बढ़कर 11,176 अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। जब लोगों की कमाई बढ़ती है, तो उनकी (per capita income expansion) क्षमता में भी इजाफा होता है, जिससे वे भविष्य की अनिश्चितताओं से निपटने के लिए तैयार होते हैं। आय के इस बढ़ते ग्राफ ने मध्यम वर्ग को निवेश और सुरक्षा उत्पादों की ओर आकर्षित किया है, जो देश की सामूहिक समृद्धि का संकेत है।
बीमा क्षेत्र में आया प्रीमियम का सुनामी जैसा उछाल
आर्थिक विकास की इस लहर ने देश के इंश्योरेंस सेक्टर की किस्मत बदल दी है और प्रीमियम संग्रह में ऐतिहासिक तेजी देखी जा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के शुरुआती आठ महीनों में कुल बीमा प्रीमियम राजस्व 17 प्रतिशत की भारी बढ़त के साथ 10.9 लाख करोड़ रुपये के स्तर को पार कर गया है। विशेष रूप से (Moody’s Forecast 2026) में 14 प्रतिशत की वृद्धि यह दर्शाती है कि अब भारतीय अपनी सेहत को लेकर पहले से कहीं अधिक सजग हो चुके हैं। पिछले साल की मात्र 7 प्रतिशत की वृद्धि के मुकाबले यह उछाल बीमा कंपनियों के लिए किसी बूस्टर डोज से कम नहीं है।
लाइफ इंश्योरेंस के नए बिजनेस में रिकॉर्ड तोड़ ग्रोथ
केवल स्वास्थ्य ही नहीं, बल्कि जीवन बीमा के क्षेत्र में भी भारतीयों ने जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है। रिपोर्ट के मुताबिक, लाइफ इंश्योरेंस के नए बिजनेस प्रीमियम में 20 प्रतिशत की प्रभावशाली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस (life insurance premium growth) के पीछे मुख्य कारण लोगों में बढ़ती जोखिम जागरूकता और अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने की चाहत है। मज़बूत आर्थिक आंकड़ों ने निवेशकों और पॉलिसीधारकों के बीच एक विश्वास पैदा किया है, जिससे बीमा क्षेत्र भारतीय अर्थव्यवस्था का एक मज़बूत स्तंभ बनकर उभर रहा है।
डिजिटल क्रांति और ‘सभी के लिए बीमा’ का बड़ा लक्ष्य
बीमा क्षेत्र की इस सफलता के पीछे तकनीक और सरकार की दूरगामी सोच का बड़ा हाथ है। भारतीय बीमा विनियामक (IRDAI) ने साल 2047 तक ‘सभी के लिए बीमा’ का लक्ष्य रखा है, जिसे पूरा करने के लिए डिजिटलीकरण को हथियार बनाया गया है। आज (digital transformation in insurance) की मदद से पॉलिसी खरीदना और क्लेम सेटलमेंट करना बेहद आसान हो गया है। मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन पोर्टल्स ने गांव-गांव तक बीमा उत्पादों की पहुंच सुनिश्चित कर दी है, जिससे वितरण प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव आया है और बिचौलियों की भूमिका कम हुई है।
सरकारी कंपनियों का कायाकल्प और विनिवेश की रणनीति
सरकार अब सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों की कार्यक्षमता और लाभप्रदता सुधारने के लिए कड़े कदम उठा रही है। एलआईसी जैसी बड़ी संस्था में अल्पांश हिस्सेदारी की बिक्री और सरकारी कंपनियों के पुनर्पूंजीकरण जैसे फैसलों से बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ी है। सरकार का मुख्य (insurance sector privatization) पर जोर देना या विलय के प्रस्ताव लाना यह सुनिश्चित करता है कि कंपनियां केवल सेवा न दें, बल्कि लाभ भी कमाएं। प्रदर्शन में सुधार की शर्त पर फंड देना इन कंपनियों को पेशेवर तरीके से काम करने के लिए प्रेरित कर रहा है।
विदेशी निवेश की बढ़ती सीमा और वित्तीय लचीलापन
मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर इशारा किया है कि विदेशी निवेश की सीमा बढ़ने से कंपनियों को नई ताकत मिलेगी। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने के प्रस्ताव से अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक और पूंजी भारत आएगी। इस (foreign direct investment policy) में बदलाव के कारण भारतीय कंपनियों को वैश्विक मानकों के अनुरूप खुद को ढालने का मौका मिलेगा। इससे न केवल कंपनियों का वित्तीय आधार मजबूत होगा, बल्कि ग्राहकों को भी वैश्विक स्तर की सेवाएं और उत्पाद मिल सकेंगे।
बेहतर मुनाफे की उम्मीद और भविष्य का रोडमैप
हालांकि वर्तमान में कुछ बीमा कंपनियों की लाभप्रदता कमजोर बनी हुई है, लेकिन आने वाले समय में स्थितियां पूरी तरह बदलने वाली हैं। आर्थिक विस्तार, कर सुधार और बढ़ती मांग के चलते मूडीज को उम्मीद है कि उद्योग के मुनाफे में बड़ा सुधार होगा। आने वाले सालों में (insurance industry profitability) का ग्राफ ऊपर जाना तय माना जा रहा है। कुल मिलाकर, भारत का बीमा क्षेत्र अब अपनी किशोरावस्था से निकलकर परिपक्वता की ओर बढ़ रहा है, जो देश के हर नागरिक को एक सुरक्षा कवच प्रदान करने के लिए तैयार है।



