Iran Protests Update: ईरान में कोहराम के बीच मौलवी का खौफनाक फरमान, बना प्रदर्शनकारियों के लिए मौत का फंदा
Iran Protests Update: ईरान के भीतर हालिया दिनों में जो उथल-पुथल मची थी, उसकी आग अभी पूरी तरह बुझी नहीं है। हालांकि सड़कों पर अब वह शोर सुनाई नहीं दे रहा, लेकिन सरकारी दफ्तरों और धार्मिक केंद्रों में (political tension) का माहौल साफ महसूस किया जा सकता है। तेहरान की गलियों में भले ही लोग अपने काम पर लौट रहे हों, लेकिन सुरक्षा बलों की भारी तैनाती और इंटरनेट पर लगी पाबंदियां बयां कर रही हैं कि सरकार किसी भी तरह के दोबारा उभरने वाले विद्रोह को कुचलने के लिए तैयार बैठी है।

कट्टरपंथी मौलवी का भड़काऊ भाषण और फांसी की मांग
शुक्रवार की नमाज के दौरान ईरान के वरिष्ठ और कट्टरपंथी मौलवी आयतुल्लाह अहमद खातमी ने जो तेवर दिखाए, उसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। उन्होंने खुले मंच से (human rights violations) की चिंता किए बिना यह मांग की कि गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को सरेआम फांसी दी जानी चाहिए। खातमी का मानना है कि जो लोग सरकार के खिलाफ हथियार उठा रहे हैं, वे देश के दुश्मन हैं और उन्हें जीवित रहने का कोई अधिकार नहीं है। उनके इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के बीच एक नई बहस और डर पैदा कर दिया है।
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को सीधी चेतावनी
मौलवी खातमी का गुस्सा सिर्फ अपने देश के प्रदर्शनकारियों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने सीधे तौर पर अमेरिका और इस्राइल के शीर्ष नेतृत्व को निशाने पर लिया। उन्होंने (international relations) के तमाम शिष्टाचारों को ताक पर रखते हुए डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू को कड़ी सजा देने की धमकी दी। मौलवी ने आरोप लगाया कि ईरान के भीतर भड़की इस आग के पीछे इन्हीं विदेशी ताकतों का हाथ है, जो ईरान की धार्मिक सत्ता को उखाड़ फेंकने की साजिश रच रहे हैं।
मौत के डरावने आंकड़े और प्रदर्शन की असलियत
भले ही ईरानी सरकार आधिकारिक तौर पर खामोश हो, लेकिन मानवाधिकार संस्थाओं की रिपोर्ट रोंगटे खड़े कर देने वाली है। बताया जा रहा है कि इस हिंसक कार्रवाई में (death toll) अब 3,090 के पार पहुंच चुका है, जो पिछले कई दशकों में ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा आंकड़ा है। यह संख्या दर्शाती है कि सत्ता को बचाने के लिए सुरक्षा बलों ने किस कदर बल प्रयोग किया है। इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों ने आम जनता के मन में गहरे जख्म और गुस्सा भर दिया है।
ट्रंप का बदला हुआ रुख और कूटनीति का खेल
एक तरफ जहां ईरान से धमकियां मिल रही हैं, वहीं वाशिंगटन से डोनाल्ड ट्रंप का बयान थोड़ा नरम नजर आया। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व द्वारा सैकड़ों लोगों को फांसी न देने के फैसले की (diplomatic efforts) के तौर पर सराहना की है। ट्रंप के इस “आभार” वाले बयान से राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अमेरिका फिलहाल सीधे सैन्य टकराव के मूड में नहीं है और वह कूटनीतिक रास्तों से इस तनाव को कम करने की कोशिश कर रहा है।
पुतिन की मध्यस्थता और वैश्विक अर्थव्यवस्था का डर
इस क्षेत्रीय संकट को टालने के लिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने ईरान और इस्राइल के नेताओं से बातचीत कर (global stability) को बनाए रखने की अपील की है। खाड़ी देशों ने भी अमेरिका को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि ईरान में किसी भी प्रकार का सैन्य हस्तक्षेप हुआ, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। पूरी दुनिया इस समय फूंक-फूंक कर कदम रख रही है ताकि तीसरा विश्व युद्ध जैसी स्थिति न बने।
रेजा पहलवी की अपील और देश के भीतर का सच
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने एक बार फिर विदेशी जमीन से आंदोलन को जारी रखने की अपील की है। उन्होंने दावा किया है कि वे जल्द ही (political change) के उद्देश्य से ईरान लौटेंगे। हालांकि, धरातल पर स्थिति कुछ और ही नजर आती है। विश्लेषकों का कहना है कि भले ही जनता सरकार से नाराज है, लेकिन रेजा पहलवी के लिए देश के भीतर वैसा व्यापक समर्थन नहीं दिख रहा है, जैसा कि वे दावा कर रहे हैं।
इंटरनेट पाबंदी और भविष्य की अनिश्चितता
ईरान में भले ही जनजीवन सामान्य दिखने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन इंटरनेट की बंदी यह साबित करती है कि प्रशासन अभी भी डरा हुआ है। सूचनाओं के (digital communication) पर कड़ा पहरा लगाकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि देश के भीतर की असल तस्वीर बाहर न जा सके। आने वाले दिन ईरान की सत्ता और वहां की जनता के संघर्ष के लिए अत्यंत निर्णायक होने वाले हैं, क्योंकि दबी हुई चिंगारी कभी भी शोला बन सकती है।