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Political Ethics in Local Polls: क्या दागदार चेहरों के बिना नहीं जीती जा सकती सत्ता की जंग, अपराध, आरोप और सियासी मजबूरी…

Political Ethics in Local Polls: महाराष्ट्र के निकाय चुनावों की आहट ने राज्य की सियासत में एक नया उबाल ला दिया है। उपमुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजित पवार ने इस बार उन उम्मीदवारों का बचाव किया है, जिन पर गंभीर आपराधिक आरोप लगे हैं। अजित पवार ने बेहद तल्ख लहजे में तर्क दिया कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को चुनाव लड़ने से रोकना अनुचित है। उन्होंने इस (electoral strategy) को सही ठहराते हुए कहा कि जब तक अदालत किसी व्यक्ति को दोषी करार नहीं दे देती, तब तक उसे अपराधी मानना न्यायसंगत नहीं है।

Political Ethics in Local Polls
Political Ethics in Local Polls

70 हजार करोड़ के सिंचाई घोटाले का दिया हवाला

अजित पवार ने अपने बचाव में खुद का उदाहरण पेश करते हुए राजनीति के दोहरे मापदंडों पर प्रहार किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि एक समय उन पर खुद 70,000 करोड़ रुपये के (irrigation scam) को अंजाम देने के गंभीर आरोप लगाए गए थे। पवार ने कटाक्ष करते हुए कहा कि आज वह उन्हीं लोगों के साथ सत्ता में बैठे हैं, जिन्होंने कभी उन पर ये कीचड़ उछाला था। उनके इस बयान ने गठबंधन सहयोगियों के बीच एक असहज स्थिति पैदा कर दी है, क्योंकि यह सीधे तौर पर राजनीतिक शुचिता पर सवाल उठाता है।

भाजपा और एनसीपी के बीच बयानों के तीखे तीर

केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता मुरलीधर मोहोल द्वारा आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को टिकट देने की आलोचना ने इस विवाद को और हवा दे दी। मोहोल के आरोपों का जवाब देते हुए पवार ने स्पष्ट किया कि वह कभी भी असामाजिक तत्वों का समर्थन नहीं करते, लेकिन (party nominations) के दौरान जमीनी हकीकत और गठबंधन की मजबूरियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि उनके नेतृत्व वाली पार्टी पारदर्शी राजनीति के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन चुनावी गणित को भी समझना जरूरी है।

जेल में बंद उम्मीदवारों को टिकट देने पर मचा बवाल

सबसे अधिक विवाद उस फैसले पर हो रहा है, जिसमें पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ निकाय चुनावों के लिए जेल में बंद व्यक्तियों के परिजनों को मैदान में उतारा गया है। एनसीपी ने अपने सहयोगी आरपीआई (सचिन खरात गुट) के माध्यम से उन महिलाओं को टिकट दिया है, जिनका संबंध हत्या के आरोपियों से है। इस (controversial candidacy) ने विपक्षी दलों को सरकार को घेरने का एक बड़ा मौका दे दिया है। आलोचकों का कहना है कि सत्ता की चाहत में राजनीतिक दल अब अपराध के साथ समझौता करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

आरपीआई के साथ गठबंधन और जीत का समीकरण

अजित पवार ने आगामी 15 जनवरी को होने वाले चुनावों के लिए अपनी रणनीति साफ कर दी है। उन्होंने घोषणा की कि वह उन सभी उम्मीदवारों की सूची की समीक्षा करेंगे, जिन्हें (coalition partners) द्वारा टिकट दिए गए हैं। पवार का मानना है कि स्थानीय चुनावों में व्यक्तिगत रसूख और गठबंधन की ताकत ही जीत का रास्ता तय करती है। हालांकि, दागी उम्मीदवारों को लेकर उठ रहे सवालों ने उनके विकास के दावों के सामने एक नैतिक दीवार खड़ी कर दी है।

पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम की आर्थिक स्थिति पर चिंता

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उपमुख्यमंत्री ने पिंपरी चिंचवाड़ नगर निगम (PCMC) की वर्तमान हालत पर गहरा दुख जताया। उन्होंने याद दिलाया कि यह कभी एशिया का सबसे अमीर नगर निकाय हुआ करता था और एनसीपी के शासनकाल में इसे (urban development) के लिए कई पुरस्कार मिले थे। पवार ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में निगम की 8,000 करोड़ रुपये की जमा राशि खत्म हो गई है और शहर कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है।

अनियमितताओं की जांच और भ्रष्टाचार पर वार

अजित पवार ने सत्ता में आने पर नगर निगम के वित्तीय लेन-देन और कथित अनियमितताओं की गहन जांच कराने का वादा किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी राशि खर्च हुई है, तो वह (infrastructure projects) के रूप में धरातल पर क्यों नहीं दिख रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी कि सार्वजनिक धन का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। हालांकि, विरोधियों का कहना है कि एक तरफ दागी उम्मीदवारों का समर्थन करना और दूसरी तरफ जांच की बात करना विरोधाभासी है।

क्या जनता स्वीकार करेगी आरोपों की दलील?

अंततः, महाराष्ट्र निकाय चुनाव की यह जंग अब विकास के मुद्दों से हटकर आरोपों और प्रत्यारोपों के इर्द-गिर्द सिमट गई है। अजित पवार की ‘दोषी साबित होने तक निर्दोष’ वाली थ्योरी (voter perception) को कितना प्रभावित करती है, यह देखना दिलचस्प होगा। महाराष्ट्र की जनता के सामने अब यह सवाल है कि क्या वे उन चेहरों पर भरोसा करेंगे जिनके साथ अपराध का साया जुड़ा है, या वे विकास और नैतिकता के नाम पर कोई नया जनादेश देंगे।

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