ChildhoodObesity – लड़कियों की भविष्य की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है बचपन का मोटापा
ChildhoodObesity – बचपन में बढ़ता मोटापा केवल तत्काल स्वास्थ्य समस्याओं तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इसका असर आगे चलकर महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है। हाल ही में प्रकाशित एक वैज्ञानिक अध्ययन में संकेत मिले हैं कि यदि किसी लड़की का वजन कम उम्र से लगातार सामान्य सीमा से अधिक रहता है, तो वयस्क होने पर उसके मां बनने की संभावना प्रभावित हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह निष्कर्ष बचपन से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की आवश्यकता को और अधिक महत्वपूर्ण बनाता है।

अध्ययन में सामने आए महत्वपूर्ण निष्कर्ष
जामा जर्नल में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, जिन लड़कियों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) लगभग छह वर्ष की उम्र से लगातार अधिक रहा, उनमें 30 से 35 वर्ष की आयु तक मां बनने की संभावना सामान्य वजन वाली लड़कियों की तुलना में करीब 42 प्रतिशत कम दर्ज की गई। शोधकर्ताओं का मानना है कि प्रजनन क्षमता से जुड़े कुछ जोखिमों की शुरुआत अपेक्षा से कहीं पहले, यानी बचपन में ही हो सकती है।
हजारों महिलाओं के आंकड़ों का किया गया विश्लेषण
इस अध्ययन के लिए 1950 से 1989 के बीच कोपेनहेगन में जन्मी 60,864 महिलाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया। शोध के दौरान स्कूल स्वास्थ्य जांच में दर्ज BMI के आंकड़ों की तुलना बाद के वर्षों में उनके मातृत्व संबंधी रिकॉर्ड से की गई। अध्ययन अवधि में लगभग 78 प्रतिशत महिलाओं ने 18 से 45 वर्ष की आयु के बीच बच्चे को जन्म दिया, जबकि शेष महिलाएं इस अवधि में मां नहीं बनीं। विश्लेषण में पाया गया कि बचपन से अधिक वजन वाली लड़कियों में मातृत्व की संभावना अपेक्षाकृत कम थी।
विशेषज्ञों ने समय रहते सतर्क रहने की दी सलाह
कोपेनहेगन यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल की शोधकर्ता डॉ. डॉर्थे पेडरसन के अनुसार, यदि बचपन से BMI लगातार सामान्य स्तर से ऊपर रहता है, तो इसका असर भविष्य में प्रजनन क्षमता पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर गर्भधारण में आने वाली कठिनाइयों को केवल वयस्क जीवन से जोड़कर देखते हैं, जबकि कुछ जैविक बदलाव बहुत पहले शुरू हो सकते हैं। इसलिए बच्चों के संतुलित वजन और स्वस्थ विकास पर शुरुआती वर्षों से ध्यान देना आवश्यक है।
केवल प्रजनन ही नहीं, अन्य बीमारियों का भी बढ़ता है खतरा
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बचपन का मोटापा आगे चलकर डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी गैर-संचारी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि अधिक वजन हार्मोनल असंतुलन और अंडाणुओं की गुणवत्ता पर प्रभाव डाल सकता है, जिससे भविष्य में गर्भधारण की संभावना प्रभावित हो सकती है। हालांकि विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यह अध्ययन एक संबंध दर्शाता है और हर व्यक्ति के मामले में परिणाम समान हों, ऐसा जरूरी नहीं है। स्वस्थ आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच बच्चों के बेहतर विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम माने जाते हैं।