NewsAwards – राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया पर खुशबू सुंदर ने उठाए अहम सवाल
NewsAwards– राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों को लेकर जारी चर्चा के बीच अभिनेत्री और राजनेता खुशबू सुंदर ने पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कई लोगों की तरह उनके मन में भी यह जिज्ञासा है कि राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के लिए जूरी का गठन किन मानकों पर किया जाता है और फिल्मों का मूल्यांकन किस आधार पर होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी किसी विशेष फिल्म या फिल्मकार के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी चयन प्रणाली को लेकर है।

चयन प्रक्रिया को लेकर जताई चिंता
एक बातचीत के दौरान खुशबू सुंदर ने कहा कि राष्ट्रीय पुरस्कार देश की सबसे प्रतिष्ठित फिल्म सम्मान प्रणाली मानी जाती है, इसलिए इसकी प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि दर्शकों और फिल्म जगत से जुड़े लोगों के मन में यह जानने की स्वाभाविक इच्छा रहती है कि जूरी का चयन कैसे होता है और अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों का मूल्यांकन किन मापदंडों के आधार पर किया जाता है। उनके अनुसार, यह सवाल केवल उनका नहीं बल्कि कई लोगों की सोच को दर्शाता है।
क्षेत्रीय फिल्मों को समान अवसर मिलने पर सवाल
खुशबू ने यह भी कहा कि देश की विभिन्न भाषाओं में हर साल कई उत्कृष्ट फिल्में बनती हैं, लेकिन यह समझना जरूरी है कि क्या सभी क्षेत्रीय फिल्म उद्योगों को समान महत्व मिलता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी वर्ष ओड़िया या गुजराती भाषा की कोई फिल्म बेहतरीन हो, तो उसे भी शीर्ष सम्मान मिलने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उनका मानना है कि पुरस्कारों में सभी भाषाओं की फिल्मों के साथ समान दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।
जूरी के फैसलों पर भी रखी अपनी राय
अभिनेत्री ने कहा कि कभी-कभी ऐसा महसूस होता है कि किसी फिल्म की लोकप्रियता या उसके आसपास बने माहौल का असर लोगों की सोच पर पड़ सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह जूरी सदस्यों की नीयत या ईमानदारी पर कोई सवाल नहीं उठा रहीं। उनके मुताबिक, चयन समिति की निष्पक्षता पर सीधे तौर पर संदेह करने का कोई आधार नहीं है, लेकिन प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता बढ़ने से ऐसे सवाल अपने आप कम हो सकते हैं।
‘रायन’ को पुरस्कार मिलने के बाद तेज हुई बहस
खुशबू सुंदर का यह बयान ऐसे समय सामने आया है, जब धनुष के निर्देशन में बनी फिल्म ‘रायन’ को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ तमिल फिल्म का सम्मान मिलने के बाद सोशल मीडिया और फिल्म जगत में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ दर्शकों का मानना है कि ‘मियाझागन’, ‘अमरन’ और ‘महाराजा’ जैसी फिल्मों को भी मजबूत दावेदार माना जा रहा था। दूसरी ओर, बड़ी संख्या में लोगों ने ‘रायन’ की उपलब्धि का स्वागत किया और इसे तमिल सिनेमा के लिए गर्व का क्षण बताया।
फिल्म उद्योग से भी मिला समर्थन
राष्ट्रीय पुरस्कार के फैसले का समर्थन करते हुए संगीतकार डी. इम्मान ने इसे तमिल फिल्म उद्योग की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्रीय फिल्म को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलना पूरी इंडस्ट्री के लिए सकारात्मक संदेश है। उनके अनुसार, ऐसे सम्मान क्षेत्रीय सिनेमा को नई पहचान देते हैं और बेहतर फिल्मों के निर्माण के लिए रचनाकारों को प्रेरित करते हैं। इसी बीच खुशबू सुंदर की टिप्पणी ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की चयन प्रक्रिया, पारदर्शिता और क्षेत्रीय फिल्मों के प्रतिनिधित्व पर नई चर्चा को जन्म दे दिया है।