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Rajkot Student Suicide Case: रूह कपा देने वाला हादसा! पिता ने बदला फोन का पासवर्ड तो सातवीं के छात्र ने मौत को लगा लिया गले

Rajkot Student Suicide Case: गुजरात के राजकोट से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने आधुनिक परवरिश और बच्चों की मानसिक स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक छोटी सी बात, जिसे अक्सर माता-पिता अनुशासन का हिस्सा मानते हैं, वह एक मासूम की जान ले लेगी, ऐसा किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। महज एक मोबाइल फोन के इस्तेमाल से रोकने और (Child Mental Health Issues) की अनदेखी ने एक हस्ते-खेलते परिवार की खुशियां उजाड़ दी हैं। इस घटना ने पूरे शहर को सन्न कर दिया है और माता-पिता के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है।

Rajkot Student Suicide Case
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चंद्रेशनगर की गलियों में पसरा मातम

राजकोट के चंद्रेशनगर मेन रोड पर रहने वाले एक ऑटो रिक्शा चालक (Rajkot Student Suicide Case) के घर में शुक्रवार की शाम किसी काल की तरह आई। मृतक की पहचान सौरभ पांडे के रूप में हुई है, जो केवल सातवीं कक्षा का छात्र था। पुलिस के अनुसार, शाम के समय जब (Tragic Domestic Incident) घटित हुई, तब घर में सामान्य कामकाज चल रहा था। सौरभ अपने कमरे में था और उसकी मां रसोई में रात के खाने की तैयारी कर रही थीं। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि बंद कमरे के भीतर सौरभ मौत का रास्ता चुन रहा है।

मां की चीख और पड़ोसियों की दौड़

जब काफी देर तक सौरभ के कमरे से कोई हलचल नहीं हुई, तो उसकी मां उसे देखने के लिए अंदर गईं। वहां का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई; सौरभ फंदे से लटका हुआ था। मां की हृदयविदारक चीख सुनकर (Emergency Response Neighbors) तुरंत मौके पर पहुंचे और आनन-फानन में एंबुलेंस को बुलाया गया। सौरभ को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। डॉक्टरों ने उसे देखते ही मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद पुलिस को मामले की सूचना दी गई।

यूपी से राजकोट तक का संघर्षपूर्ण सफर

सौरभ का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला था। बेहतर भविष्य और दो वक्त की रोटी की तलाश में वे कुछ समय पहले ही राजकोट शिफ्ट हुए थे। सौरभ के पिता एक (Hardworking Rickshaw Driver) के रूप में दिन-रात मेहनत करके अपने दो बच्चों और पत्नी का पेट पाल रहे थे। सातवीं में पढ़ने वाला सौरभ अपने भाई-बहनों में बड़ा था, जिस पर माता-पिता ने बहुत सारी उम्मीदें टिका रखी थीं। गरीबी और संघर्ष के बीच पल रहा यह परिवार अब अपने चिराग के बुझ जाने से पूरी तरह टूट चुका है।

मोबाइल फोन और पासवर्ड की वो घातक तकरार

पुलिस की प्रारंभिक जांच में आत्महत्या की जो वजह सामने आई है, वह बेहद चौंकाने वाली और दुखद है। शुक्रवार दोपहर जब सौरभ स्कूल से घर लौटा, तो वह अपनी मां के मोबाइल फोन पर व्यस्त हो गया। उसके पिता ने उसे (Smartphone Addiction Consequences) से बचाने के लिए डांटा और फोन का पासकोड बदल दिया ताकि सौरभ उसे खोल न सके। पिता पासवर्ड बदलकर अपने काम पर चले गए, लेकिन सौरभ इस पाबंदी को बर्दाश्त नहीं कर पाया और काफी परेशान रहने लगा।

अनलॉक न होने वाले फोन ने तोड़ा हौसला

पिता के जाने के बाद सौरभ ने बार-बार फोन को अनलॉक करने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। उसने अपनी मां से नया पासकोड पूछा, लेकिन मां ने यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्हें नया पासवर्ड याद नहीं है। शायद वह (Impulsive Adolescent Behavior) का शिकार हो गया और उसे लगा कि अब उसे कभी फोन इस्तेमाल करने नहीं दिया जाएगा। इसी हताशा और गुस्से के आवेश में आकर उसने वह आत्मघाती कदम उठा लिया जिसने एक पिता के अनुशासन को उम्र भर के पछतावे में बदल दिया।

मालवीयनगर पुलिस की कानूनी कार्यवाही

राजकोट की मालवीयनगर पुलिस ने इस मामले में ‘एक्सीडेंटल डेथ’ यानी असामान्य मौत का केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे (Police Investigation Process) के तहत परिवार के हर सदस्य का बयान दर्ज कर रहे हैं। हालांकि शुरुआती तौर पर यह मामला मोबाइल के कारण उपजी नाराजगी का ही लग रहा है, लेकिन पुलिस हर पहलू की बारीकी से जांच कर रही है। सौरभ के शव का पोस्टमार्टम कराकर उसे परिजनों को सौंप दिया गया है, लेकिन परिवार की आंखों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

डिजिटल युग में अभिभावकों के लिए बड़ी चेतावनी

यह घटना केवल एक सुसाइड केस नहीं है, बल्कि उन सभी माता-पिता के लिए एक चेतावनी है जो बच्चों के डिजिटल स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि (Parental Guidance Strategies) में बदलाव की सख्त जरूरत है। बच्चों से सीधे फोन छीनने या पासवर्ड बदलने के बजाय, उन्हें इसके खतरों के बारे में प्यार से समझाना और उनके साथ संवाद बनाए रखना बेहद जरूरी है। राजकोट का यह मामला समाज को यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम तकनीक के शोर में अपने बच्चों की खामोशी सुनना भूल गए हैं?

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