Forex – एफसीएनआर योजना से विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ने के संकेत, एसबीआई रिपोर्ट में बढ़ा अनुमान
Forex- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विदेशी मुद्रा आकर्षित करने की एफसीएनआर (बी) योजना अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन करती दिखाई दे रही है। एसबीआई रिसर्च की नई रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के माध्यम से भारत में कुल 80 से 85 अरब डॉलर तक की विदेशी मुद्रा आने का अनुमान है। पहले यह अनुमान 40 से 45 अरब डॉलर के बीच रखा गया था, लेकिन शुरुआती रुझानों को देखते हुए इसे संशोधित कर बढ़ा दिया गया है।

45 दिनों में उम्मीद से तेज जुटी विदेशी मुद्रा
रिपोर्ट के मुताबिक, योजना लागू होने के बाद केवल 45 दिनों के भीतर बैंकों ने इतना विदेशी फंड जुटा लिया है, जिसने वर्ष 2013 में लगभग तीन महीनों के दौरान प्राप्त राशि का रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिया। यह योजना 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी और शेष अवधि में भी निवेश का प्रवाह मजबूत रहने की संभावना जताई गई है।
योजना पूरी होने तक बढ़ सकता है निवेश
एसबीआई रिसर्च का कहना है कि केवल एफसीएनआर (बी) जमा के जरिए ही योजना समाप्त होने तक 65 से 70 अरब डॉलर तक की राशि प्राप्त हो सकती है। इसके अलावा, अगस्त और सितंबर 2026 में परिपक्व होने वाली पुरानी विदेशी मुद्रा जमाओं का बड़ा हिस्सा बेहतर ब्याज दरों के कारण दोबारा इसी योजना में निवेश किया जा सकता है। इससे कुल विदेशी मुद्रा प्रवाह का अनुमान और मजबूत हुआ है।
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की रही प्रमुख भूमिका
17 जुलाई तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अब तक जुटाई गई राशि में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का योगदान सबसे अधिक रहा है। निवेश के विभिन्न स्रोतों में बाहरी वाणिज्यिक कर्ज (ECB) के माध्यम से 1.34 अरब डॉलर और विदेशी मुद्रा में लिए गए कर्ज के जरिए 1.97 अरब डॉलर की राशि शामिल है। रिपोर्ट के अनुसार, इन माध्यमों ने विदेशी पूंजी जुटाने की प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
आरबीआई गवर्नर ने साझा किए ताजा आंकड़े
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में बताया कि जून में घोषित विदेशी मुद्रा आकर्षित करने वाले उपायों के तहत अब तक लगभग 32 अरब डॉलर भारत में आ चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कर नियमों में दी गई राहत के बाद विदेशी निवेशकों ने डेट सिक्योरिटीज में करीब 7 अरब डॉलर का निवेश किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहता है तो आने वाले महीनों में विदेशी मुद्रा प्रवाह और मजबूत हो सकता है, जिससे देश के बाहरी वित्तीय संतुलन को भी सहारा मिलेगा।