ColonCancer – लगातार थकान को समझीं सामान्य, जांच में सामने आया बड़ी आंत का कैंसर…
ColonCancer– लगातार थकान और कमजोरी को अक्सर लोग व्यस्त दिनचर्या, काम का दबाव या घरेलू जिम्मेदारियों का नतीजा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यही साधारण दिखने वाला लक्षण किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। 38 वर्षीय लॉरा जैक्सन के साथ ऐसा ही हुआ। लंबे समय तक बनी रहने वाली थकान को उन्होंने सामान्य माना, लेकिन रक्तदान के दौरान हुई जांच और बाद की मेडिकल रिपोर्ट में पता चला कि उन्हें स्टेज-3 बाउल कैंसर, जिसे बड़ी आंत का कैंसर भी कहा जाता है, है।

रक्तदान के दौरान सामने आई अहम जानकारी
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, लॉरा जब रक्तदान के लिए पहुंचीं तो शुरुआती जांच में उनके शरीर में आयरन की कमी पाई गई। इसके बाद चिकित्सकों ने एहतियात के तौर पर कुछ अतिरिक्त जांच कराने की सलाह दी। एक साधारण स्टूल टेस्ट के नतीजों ने बड़ी आंत से जुड़ी गंभीर समस्या की ओर संकेत किया। विस्तृत जांच के बाद डॉक्टरों ने स्टेज-3 बाउल कैंसर की पुष्टि की। हैरानी की बात यह रही कि उन्हें पेट में तेज दर्द, मल में खून या अन्य सामान्य लक्षण महसूस नहीं हो रहे थे।
आयरन की कमी क्यों मानी जाती है महत्वपूर्ण संकेत
विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ मरीजों में शरीर में आयरन की कमी बड़ी आंत के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकती है। ऐसी स्थिति में केवल सामान्य ब्लड टेस्ट पर्याप्त नहीं माना जाता। डॉक्टर कई मामलों में फेरिटिन टेस्ट की भी सलाह देते हैं, क्योंकि यह शरीर में संग्रहित आयरन की वास्तविक मात्रा का आकलन करता है। कई बार सामान्य आयरन स्तर ठीक दिखाई देता है, लेकिन शरीर के अंदर आयरन का भंडार कम हो चुका होता है। इसलिए लगातार एनीमिया या आयरन की कमी होने पर कारण की चिकित्सकीय जांच जरूरी मानी जाती है।
समय पर इलाज से मिली राहत
कैंसर की पुष्टि होने के बाद डॉक्टरों ने ऑपरेशन के जरिए ट्यूमर और बड़ी आंत के प्रभावित हिस्से को निकाल दिया। इसके बाद लॉरा का लगभग 12 सप्ताह तक कीमोथेरेपी से उपचार किया गया। इलाज पूरा होने के बाद उन्हें कैंसर मुक्त घोषित किया गया। चिकित्सकों का मानना है कि समय पर बीमारी का पता चल जाने से उपचार की सफलता की संभावना काफी बढ़ जाती है।
दुनिया भर में बढ़ रहा बाउल कैंसर का खतरा
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बाउल कैंसर दुनिया में सबसे अधिक पाए जाने वाले कैंसरों में शामिल है और कैंसर से होने वाली मौतों के प्रमुख कारणों में भी इसकी गिनती होती है। वर्ष 2022 में इस बीमारी के करीब 19 लाख नए मामले दर्ज किए गए, जबकि इससे 9 लाख से अधिक लोगों की मृत्यु हुई। हाल के वर्षों में कम उम्र के लोगों में भी इसके मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है, जिससे स्वास्थ्य विशेषज्ञ समय रहते जांच और जागरूकता पर विशेष जोर दे रहे हैं।
किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए
चिकित्सकों के अनुसार, मल त्याग की आदतों में लगातार बदलाव, लंबे समय तक कब्ज या दस्त रहना, मल में खून आना, बिना स्पष्ट कारण वजन कम होना, लगातार थकान और आयरन की कमी जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। हालांकि इन लक्षणों का मतलब हमेशा कैंसर होना नहीं होता, लेकिन यदि ये लंबे समय तक बने रहें तो विशेषज्ञ से परामर्श लेकर आवश्यक जांच कराना बेहतर माना जाता है। समय पर पहचान और उपचार से कई गंभीर स्थितियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।