Pharma – ब्रिक्स सहयोग से भारतीय दवा उद्योग को मिल सकता है बड़ा वैश्विक बाजार
Pharma – भारतीय जेनेरिक दवाओं पर अमेरिका की ओर से भविष्य में 100 से 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने की घोषणा के बीच भारत ने अपने निर्यात विकल्पों को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य सहयोग को विस्तार देने की पहल के तहत भारत ने सदस्य देशों के बीच दवाओं, वैक्सीन, मेडिकल उत्पादों और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में साझेदारी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव को हाल ही में आयोजित ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक में समर्थन भी मिला है।

स्वास्थ्य सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति
चंडीगढ़ में आयोजित ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की 16वीं बैठक में सदस्य देशों ने स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को व्यापक बनाने पर सहमति जताई। बैठक में सस्ती जेनेरिक दवाओं, वैक्सीन, मेडिकल उत्पादों, डिजिटल हेल्थ और पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली (AYUSH) के क्षेत्र में आपसी साझेदारी को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया। अब भारत इन देशों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय समझौतों की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
नए बाजारों में बढ़ सकती है भारतीय दवाओं की पहुंच
हालांकि इन समझौतों पर हस्ताक्षर और उनके क्रियान्वयन की कोई निश्चित समय-सीमा अभी तय नहीं हुई है, लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इनके लागू होने के बाद भारतीय दवा कंपनियों के लिए कई नए अवसर खुल सकते हैं। अनुमान है कि यदि भारत ब्रिक्स देशों और उनसे जुड़े प्रमुख उभरते बाजारों में जेनेरिक दवाओं के बाजार का सीमित हिस्सा भी हासिल कर लेता है, तो निर्यात का दायरा मौजूदा स्तर की तुलना में काफी बढ़ सकता है। इसमें ब्राजील, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र, इथियोपिया, रूस और कई अफ्रीकी देशों को संभावित प्रमुख बाजार माना जा रहा है।
अमेरिकी बाजार पर भी बनी रहेगी नजर
स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े बाजार विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका में उपयोग होने वाली जेनेरिक दवाओं का बड़ा हिस्सा भारतीय कंपनियां उपलब्ध कराती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि भविष्य में आयात शुल्क बढ़ाया जाता है, तब भी भारतीय जेनेरिक दवाएं कई ब्रांडेड दवाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम कीमत पर उपलब्ध रह सकती हैं। हालांकि ऐसे किसी अतिरिक्त शुल्क का प्रभाव अमेरिकी मरीजों, अस्पतालों और स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र की लागत पर भी पड़ सकता है।
ब्रिक्स देशों में बढ़ती मांग पर फोकस
ब्रिक्स समूह अब केवल पांच देशों तक सीमित नहीं है। इसमें मिस्र, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया, ईरान और इंडोनेशिया जैसे नए सदस्य भी शामिल हो चुके हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन देशों में कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां भारतीय जेनेरिक दवाओं की मौजूदगी अभी सीमित है, लेकिन मांग लगातार बढ़ रही है। विशेष रूप से ब्राजील के फार्मा बाजार और अफ्रीकी देशों में टीबी, एचआईवी, मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की दवाओं की आवश्यकता तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में स्वास्थ्य सहयोग के नए समझौते भारतीय दवा उद्योग के लिए दीर्घकालिक अवसर पैदा कर सकते हैं।