Court – सुरेंद्रनगर मुठभेड़ मामले में सात पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज करने के आदेश
Court- गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले में वर्ष 2021 में हुई पुलिस कार्रवाई से जुड़े चर्चित मामले में स्थानीय अदालत ने महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) की अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार करते हुए सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को समन जारी कर 8 अगस्त को पेश होने के लिए कहा है

पुलिस कार्रवाई के दौरान हुई थी दो लोगों की मौत
यह मामला 6 नवंबर 2021 का है, जब दसादा तालुका के गेडिया गांव में पुलिस कार्रवाई के दौरान वांछित आरोपी हनीफ खान मलिक और उसके नाबालिग बेटे की गोली लगने से मौत हो गई थी। उस समय पुलिस ने दावा किया था कि गिरफ्तारी के प्रयास के दौरान भीड़ ने टीम पर हमला कर दिया था, जिसके बाद आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी। दूसरी ओर, मृतक की पत्नी सोहनाबेन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने बिना किसी उकसावे के अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे दोनों की जान चली गई।
एसआईटी की रिपोर्ट पर अदालत ने जताई असहमति
मामले में अदालत के निर्देश पर मई 2025 में सात पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंपी गई। जांच पूरी होने के बाद एसआईटी ने अदालत में सी-समरी रिपोर्ट दाखिल की। इस प्रकार की रिपोर्ट तब प्रस्तुत की जाती है जब जांच एजेंसी को मामला पूरी तरह सत्य या पूरी तरह असत्य नहीं प्रतीत होता। हालांकि, मृतक की पत्नी ने इस रिपोर्ट पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि इससे संबंधित पुलिसकर्मियों को राहत देने का प्रयास किया जा रहा है।
फोरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान बने आधार
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता पुनीत दवे ने अदालत में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की रिपोर्ट प्रस्तुत की। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि मामले में आगे आपराधिक सुनवाई की आवश्यकता है। इसी आधार पर तत्कालीन पुलिस सब-इंस्पेक्टर वी.एन. जडेजा सहित सात पुलिसकर्मियों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 302 और धारा 114 के तहत कार्रवाई करने का आदेश दिया गया।
आत्मरक्षा के दावे पर उठे सवाल
अदालत में प्रस्तुत दस्तावेजों और फोरेंसिक रिपोर्ट के संबंध में याचिकाकर्ता पक्ष का कहना था कि उपलब्ध साक्ष्य पुलिस के आत्मरक्षा संबंधी दावे का स्पष्ट समर्थन नहीं करते। अदालत ने अंतिम दोष या निर्दोषता पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उपलब्ध सामग्री को प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य मानते हुए नियमित आपराधिक प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां संबंधित पुलिसकर्मियों को अदालत के समक्ष उपस्थित होना होगा।