StockMarket – वैश्विक दबाव के बीच सपाट खुला बाजार, सतर्क रहे निवेशक
StockMarket– पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के बीच मंगलवार को घरेलू शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रही। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों सीमित दायरे में कारोबार करते दिखाई दिए। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक परिस्थितियों और कॉरपोरेट नतीजों के असर से फिलहाल व्यापक बाजार में बड़ी तेजी या गिरावट के बजाय चुनिंदा शेयरों में गतिविधि देखने को मिल सकती है।

शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी का प्रदर्शन
कारोबार शुरू होते ही बीएसई सेंसेक्स 58.89 अंक की गिरावट के साथ 77,649.63 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, एनएसई निफ्टी भी 22.45 अंक फिसलकर 24,216.05 पर कारोबार करता दिखा। शुरुआती घंटों में दोनों प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव रहा, जिससे निवेशकों का सतर्क रुख साफ नजर आया।
बैंकिंग और दिग्गज शेयरों पर बना दबाव
सेंसेक्स में शामिल कई बड़ी कंपनियों के शेयर कमजोरी के साथ कारोबार करते दिखे। एचडीएफसी बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, सन फार्मा और मारुति सुजुकी के शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। खासतौर पर एचडीएफसी बैंक पर दबाव बना रहा, क्योंकि हालिया तिमाही नतीजों में बैंक का मार्जिन बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा। दूसरी ओर टेक महिंद्रा, अल्ट्राटेक सीमेंट, एशियन पेंट्स और एचसीएल टेक के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली बनी चिंता
एक्सचेंज के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 20 जुलाई को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने भारतीय शेयर बाजार से 1,121.04 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की। लगातार हो रही विदेशी बिकवाली निवेशकों की धारणा पर असर डाल रही है। इसी बीच वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड का भाव 0.63 प्रतिशत की नरमी के साथ 88.66 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता रहा, हालांकि तेल की कीमतें अब भी अपेक्षाकृत ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
किन वजहों से बाजार पर बना हुआ है दबाव
विश्लेषकों के अनुसार, कई घरेलू और वैश्विक कारक बाजार की दिशा तय कर रहे हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को सीमित किया है। इसके साथ ही कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी भी चिंता का विषय बनी हुई है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले-जुले संकेतों के कारण फिलहाल बाजार में स्थिर रुख देखने को मिल रहा है।
वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अलग-अलग तस्वीर देखने को मिली। अमेरिकी बाजार में एसएंडपी 500 फ्यूचर्स में हल्की बढ़त दर्ज की गई, जबकि जापान का टॉपिक्स सूचकांक मजबूती के साथ कारोबार करता दिखा। दूसरी ओर ऑस्ट्रेलिया और हांगकांग के बाजारों में कमजोरी रही। चीन का शंघाई कंपोजिट हल्की बढ़त के साथ कारोबार करता रहा, जबकि यूरोपीय बाजारों के शुरुआती संकेत नरम रहे। इन मिश्रित रुझानों का असर भारतीय बाजार की चाल पर भी दिखाई दे रहा है।
आगे बाजार की दिशा पर विशेषज्ञों की नजर
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और पहली तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर रहेगी। उनका कहना है कि यदि वैश्विक हालात में स्थिरता आती है और रुपये पर दबाव कम होता है तो बाजार को समर्थन मिल सकता है। फिलहाल व्यापक सूचकांकों के बजाय बेहतर वित्तीय प्रदर्शन वाली कंपनियों के शेयरों में अधिक उतार-चढ़ाव देखने की संभावना जताई जा रही है।