WildlifeProtection – नागपंचमी से पहले सांपों की पकड़ पर बढ़ी चिंता, सतर्क हुआ वन विभाग
WildlifeProtection– नागपंचमी का पर्व नजदीक आने के साथ ही समस्तीपुर जिले के विभूतिपुर क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंताएं फिर सामने आने लगी हैं। पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों का आरोप है कि धार्मिक आयोजनों में सांपों के प्रदर्शन के लिए विभिन्न इलाकों से उन्हें अवैध रूप से पकड़े जाने की गतिविधियां शुरू हो गई हैं। उनका कहना है कि सिंघियाघाट, नरहन, आलमपुर कोदरिया, मुरिया स्थान, मिश्रौलिया और देसरी सहित कई क्षेत्रों में इस तरह की आशंकाएं सामने आ रही हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

प्राकृतिक आवास से सांप पकड़ने का आरोप
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों का दावा है कि कोबरा, करैत, धामन समेत अन्य प्रजातियों के सांपों को खेतों और जंगलों से पकड़कर उनके प्राकृतिक आवास से अलग किया जा रहा है। आरोप है कि नागपंचमी तक उन्हें मिट्टी के घड़ों, टीन और प्लास्टिक के डिब्बों अथवा बोरों में बंद रखकर मेलों में प्रदर्शन के लिए तैयार किया जाता है। उनका कहना है कि इस दौरान इन वन्यजीवों को पर्याप्त भोजन और पानी भी नहीं मिल पाता, जिससे उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
संरक्षण कार्यकर्ताओं ने जताई चिंता
वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. अंजनी कुमार द्विवेदी का कहना है कि नागपंचमी के अवसर पर कुछ स्थानों पर होने वाले सांपों के प्रदर्शन भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और पशु क्रूरता से संबंधित प्रावधानों के अनुरूप नहीं हैं। उनके अनुसार, कुछ मामलों में सांपों के साथ अमानवीय व्यवहार किए जाने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार सांप दूध पचाने में सक्षम नहीं होते, इसलिए उन्हें दूध पिलाना उनके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
कानून में हैं सख्त प्रावधान
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत अधिकांश सांप संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में आते हैं। ऐसे में उन्हें पकड़ना, कैद में रखना, खरीदना-बेचना या सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए इस्तेमाल करना कानून के दायरे में अपराध माना जाता है। संबंधित प्रावधानों के तहत दोषी पाए जाने पर कारावास और आर्थिक दंड दोनों का प्रावधान है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि पर्व के दौरान कानून के प्रति लोगों को अधिक जागरूक करने की आवश्यकता है।
पिछले वर्ष भी हुई थी कार्रवाई, विभाग ने दिया आश्वासन
जानकारी के अनुसार, पिछले वर्ष विभूतिपुर थाना क्षेत्र में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कई लोगों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया था। इसके बावजूद पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस बार भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और जनजागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। इस संबंध में समस्तीपुर के डीएफओ नरिंदर पाल सिंह ने कहा कि वन विभाग वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने बताया कि लोगों को जागरूक करने के साथ-साथ कानून का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई भी की जाएगी।