LegalNews – आसाराम की अंतरिम जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगी मेडिकल रिपोर्ट
LegalNews– सुप्रीम कोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम की स्वास्थ्य संबंधी दलीलों पर सुनवाई करते हुए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक को उनकी चिकित्सीय स्थिति की जांच के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि गठित बोर्ड एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे। आसाराम ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की है, जिस पर अब मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे विचार किया जाएगा।

मेडिकल रिपोर्ट के बाद होगा अगला फैसला
जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल नियमित जमानत पर कोई विचार नहीं किया जा रहा है। अदालत ने कहा कि यदि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होता है कि स्वास्थ्य कारणों से विशेष राहत की आवश्यकता है, तभी अंतरिम जमानत के अनुरोध पर आगे निर्णय लिया जाएगा। न्यायालय ने पहले निष्पक्ष चिकित्सीय मूल्यांकन को आवश्यक माना है।
सुनवाई के दौरान सरकार का पक्ष
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कुछ महीने पहले आसाराम ने काशी विश्वनाथ और अयोध्या की यात्रा की थी। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें यह कहते हुए राहत दी गई थी कि उनकी शारीरिक स्थिति बेहद कमजोर है, जबकि बाद में उनके यात्रा करने की जानकारी सामने आई। इस पर पीठ ने कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट का इंतजार किया जाएगा।
बचाव पक्ष ने मेडिकल बोर्ड गठित करने का किया अनुरोध
आसाराम की ओर से पेश अधिवक्ता ने अदालत से आग्रह किया कि एम्स के निदेशक की देखरेख में विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम गठित कर उनकी विस्तृत स्वास्थ्य जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि मेडिकल बोर्ड यह तय कर सकेगा कि उनकी मौजूदा स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता है या नहीं। इसी अनुरोध को स्वीकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट पहले ही बरकरार रख चुका है उम्रकैद
इससे पहले राजस्थान हाईकोर्ट ने 27 मई को वर्ष 2013 में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376(2)(एफ) के तहत दोषसिद्धि कायम रखते हुए निचली अदालत के फैसले को सही माना। साथ ही धारा 342, 370(4), 506, 509 और 354(ए) सहित पॉक्सो अधिनियम की धारा 7 और 8 तथा किशोर न्याय अधिनियम की धारा 23 के तहत भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया।
कुछ आरोपों से मिली थी राहत
राजस्थान हाईकोर्ट ने अपने फैसले में सामूहिक दुष्कर्म और बच्चे के साथ गंभीर यौन उत्पीड़न से जुड़े कुछ आरोपों में आसाराम को राहत दी थी। हालांकि, नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया। उल्लेखनीय है कि 25 अप्रैल 2018 को ट्रायल कोर्ट ने आश्रम में पढ़ने वाली नाबालिग छात्रा के यौन उत्पीड़न मामले में उन्हें दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।