Yoga – एसिडिटी और पाचन संबंधी परेशानी में मददगार हो सकते हैं ये योगासन
Yoga- बदलती जीवनशैली, अनियमित भोजन, तनाव और देर रात तक जागने जैसी आदतों का असर सबसे पहले पाचन तंत्र पर दिखाई देता है। इसके कारण कई लोगों को एसिडिटी, गैस, पेट फूलना, अपच और कब्ज जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित खानपान और नियमित दिनचर्या के साथ योग का अभ्यास भी पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। हालांकि, यदि पेट से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहे या तेज दर्द, लगातार उल्टी अथवा अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।

वज्रासन भोजन के बाद भी किया जा सकता है
योग विशेषज्ञों के अनुसार वज्रासन उन चुनिंदा आसनों में शामिल है, जिन्हें भोजन के बाद भी किया जा सकता है। इस मुद्रा में घुटनों को मोड़कर एड़ियों पर बैठा जाता है और रीढ़ को सीधा रखा जाता है। पांच से दस मिनट तक सामान्य गति से श्वास लेने का अभ्यास किया जा सकता है। माना जाता है कि यह आसन पाचन प्रक्रिया को सहज बनाने और भोजन के बाद होने वाली असहजता को कम करने में मदद कर सकता है।
पवनमुक्तासन गैस और पेट फूलने में हो सकता है उपयोगी
पेट में गैस बनने या भारीपन महसूस होने पर पवनमुक्तासन का अभ्यास लाभकारी माना जाता है। इस आसन में पीठ के बल लेटकर दोनों घुटनों को सीने की ओर लाया जाता है और कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में रहा जाता है। योग विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित अभ्यास से गैस, पेट फूलने और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। शुरुआत हमेशा अपनी क्षमता के अनुसार ही करनी चाहिए।
बालासन तनाव कम करने में निभा सकता है भूमिका
तनाव भी कई लोगों में एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याओं का एक कारण बन सकता है। ऐसे में बालासन शरीर और मन दोनों को आराम देने वाली योग मुद्रा मानी जाती है। इस आसन में घुटनों के बल बैठकर शरीर को आगे झुकाया जाता है और माथा जमीन से लगाया जाता है। कुछ मिनट तक सामान्य श्वास लेते हुए इस स्थिति में रहने से मानसिक शांति महसूस हो सकती है, जिसका सकारात्मक असर पाचन तंत्र पर भी पड़ सकता है।
मार्जरी-व्याघ्रासन से सक्रिय हो सकता है पाचन तंत्र
मार्जरी-व्याघ्रासन में रीढ़ और पेट के आसपास की मांसपेशियों की हल्की गतिविधि होती है। इस अभ्यास के दौरान सांस लेते हुए कमर को नीचे और सिर को ऊपर उठाया जाता है, जबकि सांस छोड़ते समय पीठ को गोल किया जाता है। नियमित रूप से 10 से 15 बार इस प्रक्रिया को दोहराने से शरीर में लचीलापन बढ़ने के साथ पाचन क्रिया को भी सहयोग मिल सकता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन से मिल सकता है अतिरिक्त लाभ
अर्ध मत्स्येन्द्रासन एक ट्विस्टिंग योग मुद्रा है, जिसमें शरीर को एक ओर मोड़कर कुछ सेकंड तक उसी स्थिति में रखा जाता है। योग प्रशिक्षकों के अनुसार यह आसन पेट के अंगों को सक्रिय करने और पाचन प्रक्रिया को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। इसके साथ ही शरीर की लचक बढ़ाने में भी यह उपयोगी माना जाता है। किसी भी योगासन का अभ्यास खाली पेट या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार करना बेहतर रहता है, ताकि अधिकतम लाभ मिल सके और अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।