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NEET – जंतर मंतर प्रदर्शन के बीच सोनम वांगचुक ने सरकार से संवाद की अपील की…

NEET – राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) से जुड़े विवाद को लेकर राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से संवाद शुरू करने की अपील की है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। इसी क्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी उठाई जा रही है। वांगचुक पिछले कई दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और उनका कहना है कि यह आंदोलन केवल एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की मांग को लेकर है।

जवाबदेही को बताया सुधार की पहली शर्त

एक बातचीत में सोनम वांगचुक ने कहा कि केवल किसी मंत्री के इस्तीफे से परीक्षा व्यवस्था की सभी समस्याएं समाप्त नहीं हो जाएंगी। उनके अनुसार, यदि जवाबदेही तय होती है तो व्यापक सुधारों का रास्ता खुल सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक जिम्मेदारी तय करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं होगी, तब तक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहेगी। उनका मानना है कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता देश के भविष्य से जुड़ी है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही का असर समाज के कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है।

शिक्षा व्यवस्था पर जताई चिंता

वांगचुक ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को गंभीर विषय बताते हुए कहा कि यदि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष नहीं होगी तो इसका प्रभाव चिकित्सा, इंजीनियरिंग और अन्य पेशेवर क्षेत्रों पर भी दिखाई देगा। उन्होंने कहा कि योग्य उम्मीदवारों को समान अवसर मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियादी आवश्यकता है। उनके अनुसार, शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और ईमानदारी बनाए रखना देश के दीर्घकालिक विकास के लिए आवश्यक है।

सरकार से बातचीत की उम्मीद बरकरार

भूख हड़ताल के दौरान सरकार की ओर से किसी औपचारिक संपर्क के सवाल पर वांगचुक ने कहा कि अब तक उन्हें इस संबंध में कोई संदेश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास आंदोलन की आवाज को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने का है ताकि इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हो सके। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर अपनी भागीदारी दर्ज कराएं और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखें।

संसद में चर्चा और विशेषज्ञों की भागीदारी की मांग

वांगचुक ने सुझाव दिया कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे पर संसद के आगामी सत्र में विस्तार से चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार यदि व्यापक बदलाव करना चाहती है तो शिक्षाविदों, विशेषज्ञों और युवाओं के सुझावों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, दीर्घकालिक सुधार केवल संवाद और सभी पक्षों की भागीदारी से ही संभव हैं।

सभी राजनीतिक दलों से समर्थन की अपील

विरोध प्रदर्शन में विभिन्न राजनीतिक दलों की संभावित भागीदारी के सवाल पर वांगचुक ने कहा कि यह आंदोलन किसी दल विशेष का नहीं, बल्कि छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी दलों के जनप्रतिनिधि इस विषय की गंभीरता को समझते हुए अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। उनका कहना था कि ऐसे मुद्दों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर देखने की आवश्यकता है।

प्रधानमंत्री के नाम दिया संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपने संदेश में वांगचुक ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की आवाज सुनना सरकार के हित में होता है। उन्होंने आग्रह किया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशा जाए। वांगचुक ने यह भी कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से प्रधानमंत्री से कभी मुलाकात नहीं की है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि छात्रों और अभिभावकों की चिंताओं पर सकारात्मक पहल होगी।

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