लाइफ स्टाइल

Anger – जानें बार-बार गुस्सा आना क्यों हो सकता है नुकसानदेह…

Anger- गुस्सा इंसानी भावनाओं का सामान्य हिस्सा है, लेकिन जब यह बार-बार या जरूरत से ज्यादा होने लगे तो इसका असर केवल व्यवहार तक सीमित नहीं रहता। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगातार गुस्सा करने की आदत शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर दबाव बढ़ा सकती है। यही कारण है कि चिकित्सक भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और तनाव को नियंत्रित करने के उपाय अपनाने की सलाह देते हैं।

गुस्से के दौरान शरीर में क्या बदलाव होते हैं

जब कोई व्यक्ति अत्यधिक गुस्सा करता है, तब शरीर में तनाव से जुड़े हार्मोन जैसे एड्रेनालिन और कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ जाता है। इसके कारण हृदय की धड़कन तेज हो सकती है, सांस लेने की गति बदल सकती है और रक्तचाप भी बढ़ने लगता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति बार-बार बने तो शरीर पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ सकता है।

ब्लड प्रेशर पर पड़ सकता है असर

चिकित्सकीय जानकारी के अनुसार गुस्से की स्थिति में रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। यदि किसी व्यक्ति को पहले से उच्च रक्तचाप की समस्या है तो लगातार तनाव और गुस्सा स्थिति को और गंभीर बना सकता है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर रहने से हृदय, मस्तिष्क, आंखों और किडनी से जुड़ी जटिलताओं का खतरा भी बढ़ सकता है।

हृदय को करना पड़ता है अतिरिक्त काम

विशेषज्ञ बताते हैं कि गुस्से के समय हृदय सामान्य से अधिक तेजी से रक्त पंप करता है। इससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ जाते हैं। जिन लोगों को पहले से हृदय रोग, धमनियों में रुकावट या अन्य कार्डियक समस्याएं हैं, उनके लिए अत्यधिक गुस्सा जोखिम बढ़ाने वाला कारक बन सकता है। कई अध्ययनों में यह भी संकेत मिले हैं कि तीव्र गुस्से के बाद कुछ समय तक हार्ट अटैक और स्ट्रोक की आशंका सामान्य से अधिक हो सकती है।

सोचने और निर्णय लेने की क्षमता भी होती है प्रभावित

अत्यधिक गुस्से की अवस्था में मस्तिष्क का वह हिस्सा कम सक्रिय हो सकता है जो तर्क, धैर्य और सही निर्णय लेने में मदद करता है। इसी वजह से कई लोग आवेश में ऐसे फैसले ले लेते हैं या ऐसी बातें कह देते हैं जिनका बाद में पछतावा होता है। लगातार तनाव और भावनात्मक असंतुलन का असर एकाग्रता, याददाश्त और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ सकता है।

केवल रिश्तों ही नहीं, पूरे स्वास्थ्य पर पड़ता है प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक अनियंत्रित गुस्सा केवल सामाजिक संबंधों को ही प्रभावित नहीं करता, बल्कि शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता पर भी असर डाल सकता है। लगातार तनाव से थकान, नींद की समस्या और मानसिक दबाव बढ़ने की आशंका रहती है। इसलिए भावनाओं को दबाने के बजाय उन्हें स्वस्थ तरीके से संभालना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

गुस्से को नियंत्रित करने के लिए क्या करें

विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, ध्यान, गहरी सांस लेने की तकनीक और तनाव कम करने वाली गतिविधियां अपनाने से गुस्से को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। यदि किसी व्यक्ति को लंबे समय से अत्यधिक गुस्सा, चिड़चिड़ापन या तनाव महसूस हो रहा हो और उसका असर दैनिक जीवन पर पड़ने लगे, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित कदम हो सकता है।

Back to top button

Adblock Detected

Please disable your AdBlocker first, and then you can watch everything easily.