Road Safety – ऊधमसिंह नगर में राह-वीर योजना को नहीं मिला एक भी दावेदार
Road Safety– सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को समय रहते अस्पताल पहुंचाना उसकी जान बचाने में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन ऊधमसिंह नगर में इस दिशा में लागू केंद्र सरकार की राह-वीर योजना अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकी है। जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच जिले में सैकड़ों सड़क हादसे दर्ज होने के बावजूद अब तक ऐसा एक भी मामला सामने नहीं आया, जिसमें किसी नागरिक ने योजना के तहत प्रोत्साहन राशि या सम्मान के लिए आवेदन किया हो।

दुर्घटनाओं के बावजूद नहीं बढ़ी भागीदारी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच जिले में 470 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं। इन हादसों में 250 से ज्यादा लोगों की जान गई, जबकि 590 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। इतनी बड़ी संख्या में दुर्घटनाएं होने के बावजूद परिवहन विभाग को राह-वीर योजना के तहत किसी भी नागरिक की ओर से आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। एआरटीओ कार्यालय का कहना है कि योजना लागू होने के बाद से अब तक किसी व्यक्ति को इस पहल के तहत सम्मानित करने का अवसर नहीं मिला है।
क्या है राह-वीर योजना
केंद्र सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता दिलाने के उद्देश्य से राह-वीर योजना शुरू की है। इस योजना के तहत यदि कोई नागरिक दुर्घटना के बाद ‘गोल्डन आवर’ के भीतर घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में मदद करता है, तो उसे 25 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि, प्रशस्ति पत्र और ट्रॉफी प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर चयनित होने वाले सहायता करने वालों को एक लाख रुपये तक का सम्मान भी दिया जा सकता है। योजना का उद्देश्य आम नागरिकों को बिना झिझक मानवीय सहायता के लिए आगे आने के लिए प्रेरित करना है।
जागरूकता और कानूनी आशंकाएं बनी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि बड़ी संख्या में लोग आज भी सड़क हादसों में घायल व्यक्तियों की मदद करने से इसलिए हिचकते हैं क्योंकि उन्हें पुलिस कार्रवाई, पूछताछ या अदालत की प्रक्रिया का डर रहता है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश स्पष्ट करते हैं कि मदद करने वाले नागरिक को अनावश्यक कानूनी प्रक्रिया में शामिल नहीं किया जा सकता। अधिकारियों के अनुसार कई लोग मानवीय आधार पर सहायता तो करते हैं, लेकिन अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते, जिससे उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल पाता।
बेहतर समन्वय और जागरूकता की जरूरत
राह-वीर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन में जानकारी का अभाव भी एक बड़ी बाधा माना जा रहा है। फिलहाल ऐसा कोई व्यवस्थित तंत्र नहीं है, जिसके माध्यम से अस्पताल, पुलिस और परिवहन विभाग मिलकर दुर्घटना स्थल पर मदद करने वाले व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित कर सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया को और सरल बनाया जाए, तो अधिक लोग आगे आ सकते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नैनीताल में 25, हरिद्वार में दो तथा देहरादून, टिहरी और पौड़ी में एक-एक व्यक्ति इस योजना के तहत सम्मानित हो चुके हैं, जबकि ऊधमसिंह नगर अब भी इस सूची में शामिल नहीं हो पाया है।