ElectionNews – बारुईपुर मामले पर राजनीतिक बयानबाजी तेज, विपक्ष ने उठाए कई सवाल
ElectionNews – पश्चिम बंगाल के बारुईपुर में 12 वर्षीय बच्ची से कथित दुष्कर्म की घटना को लेकर राज्य की राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। घटना के बाद विभिन्न राजनीतिक दलों ने कानून-व्यवस्था, पीड़िता को न्याय और राजनीतिक हस्तक्षेप जैसे मुद्दों पर अपनी-अपनी राय रखी है। इस बीच, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बारुईपुर जाने से रोके जाने का मामला भी राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।

टीएमसी ने सरकार के रवैये पर जताई आपत्ति
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं ने आरोप लगाया कि घटना के बाद जिस तरह की प्रशासनिक कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिबंध देखने को मिले, वे लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। पार्टी का कहना है कि यह केवल एक सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उससे कहीं अधिक गंभीर स्थिति को दर्शाता है। नेताओं ने दावा किया कि विपक्षी नेताओं की आवाज़ को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े होते हैं।
ममता बनर्जी को रोकने पर सांसदों की प्रतिक्रिया
टीएमसी सांसद डोला सेन ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को बारुईपुर जाने से रोके जाने पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात बेहद चिंताजनक हैं और इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं मानी जा सकती। उनके अनुसार, किसी जनप्रतिनिधि को संवेदनशील मामले में प्रभावित क्षेत्र का दौरा करने से रोकना कई सवाल खड़े करता है।
पार्टी सांसद प्रतिमा मंडल ने भी इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि बच्ची के साथ हुई कथित वारदात बेहद दुखद और शर्मनाक है। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के दौरे पर रोक लगाना राजनीतिक कारणों से प्रेरित कदम प्रतीत होता है। उनका कहना था कि यदि उन्हें लोगों के बीच जाने की अनुमति मिलती, तो बड़ी संख्या में नागरिक उनका समर्थन करने के लिए पहुंच सकते थे।
कांग्रेस ने उठाया समान दृष्टिकोण का मुद्दा
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दुष्कर्म जैसी घटनाओं को राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि चाहे किसी भी राज्य में, किसी भी दल की सरकार के दौरान ऐसी घटना हो, हर मामले को समान गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके अनुसार, समाज और सरकार दोनों की जिम्मेदारी है कि ऐसे अपराधों पर निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
राजनीतिक बहस के बीच न्याय की मांग
बारुईपुर की इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था तथा संवेदनशील मामलों में राजनीतिक प्रतिक्रिया को लेकर चर्चा तेज कर दी है। विभिन्न दल अपने-अपने दृष्टिकोण सामने रख रहे हैं, जबकि आम अपेक्षा यही है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। पीड़िता और उसके परिवार को न्याय दिलाना इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष माना जा रहा है।