SugarMill – रैयाम और सकरी चीनी मिलों के पुनरुद्धार की तैयारी शुरू, किसानों से मांगे गए आवेदन
SugarMill – दरभंगा की लंबे समय से बंद पड़ी रैयाम और सकरी चीनी मिलों को दोबारा संचालित करने की दिशा में राज्य सरकार ने नई पहल शुरू की है। सहकारिता विभाग ने प्रस्तावित सहकारी चीनी मिल समितियों के गठन के लिए गन्ना उत्पादक किसानों का सदस्यता अभियान शुरू कर दिया है। इस अभियान के तहत पात्र किसान 30 जुलाई 2026 तक आवेदन कर सकते हैं। सरकार का उद्देश्य सहकारी व्यवस्था के माध्यम से दोनों मिलों को फिर से चालू कर क्षेत्र की कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति देना है।

सदस्यता अभियान के लिए तय की गई समय सीमा
सहकारिता विभाग के अनुसार सदस्य बनने के इच्छुक गन्ना किसान निर्धारित अवधि के भीतर आवेदन कर सकते हैं। विभाग का कहना है कि विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) राज्य सरकार को सौंपे जाने के बाद अब किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस पहल से रैयाम, सकरी और आसपास के क्षेत्रों के किसानों में एक बार फिर चीनी उद्योग के पुनर्जीवन की उम्मीद जगी है।
जिला स्तर पर समिति का गठन
रैयाम चीनी मिल के पुनरुद्धार की प्रक्रिया को गति देने के लिए जिलाधिकारी कौशल कुमार की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति बनाई गई है। समिति में केवटी विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा को भी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। प्रशासन का कहना है कि पुनरुद्धार से जुड़ी प्रक्रियाओं की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ सके।
सदस्य बनने के लिए पात्रता क्या होगी
सहकारिता विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार आवेदन करने वाले किसान की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए। आवेदक संबंधित चीनी मिल के कमांड क्षेत्र का निवासी हो और वर्तमान में गन्ने की खेती करता हो या आगामी दो पेराई सत्रों में गन्ना उत्पादन करने की प्रतिबद्धता रखता हो। सामान्य वर्ग के किसानों के लिए लगभग 2.5 एकड़ कृषि योग्य भूमि तथा आरक्षित वर्ग के किसानों के लिए न्यूनतम 50 डिसमिल कृषि भूमि की शर्त निर्धारित की गई है। एक परिवार से केवल एक सदस्य को समिति में शामिल किया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन और सहायता की सुविधा
इच्छुक किसान ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर संबंधित पैक्स, प्रखंड स्तरीय आयोजन समिति या विभाग की ओर से जारी हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता ली जा सकती है। सरकार का लक्ष्य गुजरात और ओडिशा के सफल सहकारी मॉडल की तर्ज पर इन चीनी मिलों को पुनर्जीवित करना है और अगले एक से दो वर्षों में इनके संचालन की दिशा में प्रगति करना है।
किसानों और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मिलने की उम्मीद
रैयाम चीनी मिल वर्ष 1994 और सकरी चीनी मिल वर्ष 1996 से बंद पड़ी हैं। इन मिलों के बंद होने से क्षेत्र के कई मजदूरों और गन्ना किसानों की आजीविका प्रभावित हुई थी। सहकारिता विभाग का कहना है कि सदस्यता अभियान पूरा होने के बाद पंजीकृत किसानों का डेटा तैयार होगा, जिसके आधार पर उन्हें उन्नत बीज, खाद और आधुनिक कृषि तकनीक से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई जाएगी। जनप्रतिनिधियों का भी कहना है कि सहकारी मॉडल के माध्यम से किसानों की भागीदारी बढ़ेगी और भविष्य में उन्हें मिल के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका मिलेगी।