Defence – भारत और जापान ने बढ़ाई संयुक्त रक्षा परियोजना, नौसेना तकनीक पर किया सहयोग
Defence – भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में सहयोग को नई दिशा देते हुए अपनी पहली संयुक्त रक्षा सह-विकास परियोजना की घोषणा की है। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच हुई वार्ता के बाद यह निर्णय लिया गया कि अत्याधुनिक नेवल रेडियो एंटीना तकनीक का विकास और निर्माण मिलकर किया जाएगा। इस पहल को दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक संबंधों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

आधुनिक नौसैनिक तकनीक पर रहेगा साझा फोकस
संयुक्त परियोजना के तहत जिस प्रणाली पर काम किया जाएगा, उसे यूनिफाइड कॉम्प्लेक्स रेडियो एंटीना के नाम से जाना जाता है। यह पारंपरिक हथियार प्रणाली नहीं, बल्कि आधुनिक रडार, सुरक्षित संचार और इलेक्ट्रॉनिक निगरानी तकनीकों का एकीकृत ढांचा है। इसे युद्धपोत के ऊपरी हिस्से में स्थापित किया जाता है, जहां से यह विभिन्न प्रकार के सेंसर और संचार उपकरणों का संचालन करता है। इस तकनीक का उद्देश्य नौसेना के जहाजों को अधिक प्रभावी निगरानी और सुरक्षित संचार क्षमता उपलब्ध कराना है।
भारतीय नौसेना की क्षमताओं में होगा विस्तार
विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक के शामिल होने से भारतीय युद्धपोतों की परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी। यह प्रणाली समुद्र में दूर तक निगरानी रखने, संभावित खतरों का समय रहते पता लगाने और विभिन्न परिस्थितियों में सुरक्षित संचार बनाए रखने में मदद करेगी। साथ ही इसकी डिजाइन ऐसी है कि युद्धपोतों की पहचान दुश्मन के रडार के लिए अपेक्षाकृत कठिन हो सकती है। इससे समुद्री अभियानों के दौरान नौसेना को रणनीतिक बढ़त मिलने की संभावना जताई जा रही है।
समुद्री सुरक्षा और निगरानी होगी अधिक प्रभावी
नई तकनीक के जरिए युद्धपोत दूरस्थ क्षेत्रों से प्राप्त होने वाले रेडियो और इलेक्ट्रॉनिक संकेतों का विश्लेषण करने में अधिक सक्षम होंगे। इसके अलावा प्रतिकूल मौसम, चक्रवात या अन्य चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी उपग्रहों और सैन्य प्लेटफॉर्म के साथ निर्बाध संपर्क बनाए रखना आसान होगा। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद महासागर क्षेत्र में बढ़ती सामरिक गतिविधियों के बीच यह क्षमता समुद्री निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर सकती है।
ऊर्जा सुरक्षा पर भी बढ़ेगा द्विपक्षीय सहयोग
रक्षा सहयोग के साथ-साथ भारत और जापान ने ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में भी साझेदारी को विस्तार देने पर सहमति जताई है। दोनों देशों ने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडारण, आपातकालीन ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करने का निर्णय लिया है। इसके लिए भारत के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और जापान के अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्रालय के बीच सहयोग की रूपरेखा तैयार की गई है।
आपूर्ति व्यवस्था और बाजार स्थिरता पर रहेगा जोर
संयुक्त वक्तव्य के अनुसार दोनों देश कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के रणनीतिक भंडारण, आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र तथा ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला को अधिक मजबूत बनाने के लिए समन्वय बढ़ाएंगे। इसके अलावा उत्पादक देशों के साथ सहयोग, संभावित आपूर्ति बाधाओं से निपटने और ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने के उपायों पर भी साझा प्रयास किए जाएंगे। दोनों पक्षों का मानना है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में यह सहयोग दीर्घकालिक ऊर्जा और सामरिक सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होगा।