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Monsoon – कमजोर बारिश से घटी खरीफ बुवाई, कृषि क्षेत्र में बढ़ी चिंता

Monsoon – देश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की धीमी रफ्तार का असर अब कृषि क्षेत्र में साफ दिखाई देने लगा है। समय पर पर्याप्त वर्षा नहीं होने से खरीफ फसलों की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम दर्ज की गई है। मौसम की मौजूदा स्थिति और अल-नीनो की संभावित सक्रियता ने किसानों के साथ-साथ नीति निर्माताओं की चिंता भी बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले कुछ सप्ताह में वर्षा सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर कृषि उत्पादन, खाद्य आपूर्ति और महंगाई पर पड़ सकता है।

खरीफ फसलों के रकबे में दर्ज हुई उल्लेखनीय कमी

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 25 जून तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई का कुल क्षेत्रफल 182.72 लाख हेक्टेयर रहा, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 236.46 लाख हेक्टेयर था। इस तरह बुवाई के कुल रकबे में करीब 23 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। धान की खेती भी प्रभावित हुई है और इसका रकबा पिछले वर्ष की तुलना में लगभग एक चौथाई कम हो गया है। इसके अलावा तिलहन, दालें, मोटे अनाज और कपास जैसी प्रमुख फसलों के क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई है। हालांकि गन्ना और जूट की खेती में सीमित बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

बारिश की कमी बनी सबसे बड़ी वजह

भारतीय मौसम विभाग के अनुसार, 24 जून तक देश में मानसूनी वर्षा सामान्य से 42 प्रतिशत कम रही। सबसे अधिक कमी मध्य भारत में दर्ज की गई, जहां सामान्य से 59 प्रतिशत कम बारिश हुई। पूर्व और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में भी वर्षा औसत से काफी नीचे रही, जबकि दक्षिणी और उत्तर-पश्चिमी हिस्सों में भी बारिश सामान्य स्तर तक नहीं पहुंच सकी। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रशांत महासागर में अल-नीनो की स्थिति मानसून की रफ्तार को प्रभावित कर सकती है, जिससे आने वाले सप्ताह भी कृषि के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।

जलाशयों में घटता जलस्तर बढ़ा रहा चिंता

कम बारिश का असर सिंचाई व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, देश के 166 प्रमुख जलाशयों में 25 जून तक उपलब्ध जल भंडार उनकी कुल क्षमता का केवल 26.37 प्रतिशत रहा। कई जलाशयों में पानी का स्तर सामान्य से काफी नीचे पहुंच चुका है। रिपोर्ट के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे जलाशय हैं जहां जल उपलब्धता सामान्य स्तर के 80 प्रतिशत से भी कम है, जबकि कुछ स्थानों पर यह आधे से भी नीचे दर्ज की गई है। इससे सिंचाई पर निर्भर किसानों की मुश्किलें बढ़ने की आशंका है।

कृषि उत्पादन और बाजार पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मानसून की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो खरीफ उत्पादन प्रभावित हो सकता है। उत्पादन घटने की स्थिति में खाद्यान्न और अन्य कृषि उत्पादों की आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बन सकती है। ऐसे हालात में सरकार और संबंधित एजेंसियां मौसम की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

अगले कुछ सप्ताह रहेंगे निर्णायक

कृषि क्षेत्र के लिए जुलाई का महीना बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसी अवधि में खरीफ फसलों की अधिकांश बुवाई पूरी होती है। यदि आने वाले दिनों में वर्षा सामान्य होती है तो बुवाई की रफ्तार में सुधार संभव है। वहीं, यदि बारिश में देरी जारी रहती है तो इसका प्रभाव केवल किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य बाजार, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

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