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WaheedaRehman – चंबल में शूटिंग के दौरान सुनील दत्त की डांट के पीछे थी ये बड़ी वजह

WaheedaRehman – हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने अभिनेता और निर्माता सुनील दत्त से जुड़ा एक ऐसा अनुभव साझा किया था, जिसने उनके व्यक्तित्व की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दोनों को सामने ला दिया। पहली नजर में यह घटना एक सामान्य डांट जैसी लगी थी, लेकिन बाद में पता चला कि इसके पीछे कलाकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता छिपी हुई थी। यह किस्सा फिल्म ‘मुझे जीने दो’ की शूटिंग के दौरान चंबल क्षेत्र का है, जहां पूरी टीम कई दिनों तक रुकी हुई थी।

किरदार में पूरी तरह डूब जाते थे सुनील दत्त

एक पुराने टेलीविजन कार्यक्रम में बातचीत के दौरान वहीदा रहमान ने बताया था कि उन्होंने सुनील दत्त के साथ कई फिल्मों में काम किया और उन्हें हमेशा अपने काम के प्रति बेहद समर्पित पाया। उनके अनुसार, ‘मुझे जीने दो’ और ‘रेशमा और शेरा’ जैसी फिल्मों की शूटिंग चुनौतीपूर्ण इलाकों में हुई थी। चंबल की लोकेशन पर पूरी यूनिट टेंट में रहती थी और सुनील दत्त अपने निभाए जा रहे किरदार की गंभीरता को शूटिंग के दौरान लगातार बनाए रखते थे। वह मजाक-मस्ती से दूर रहते और अपने चरित्र के अनुरूप ही व्यवहार करते थे, जिससे कई बार सह-कलाकार भी हैरान हो जाते थे।

नरगिस से की थी हल्की-फुल्की शिकायत

वहीदा रहमान ने बताया कि शूटिंग के दौरान एक समय ऐसा भी आया जब नरगिस दत्त अपने छोटे बेटे संजय दत्त के साथ लोकेशन पर पहुंचीं। उस समय संजय की उम्र करीब ढाई वर्ष थी। उसी दौरान उन्होंने मुस्कुराते हुए नरगिस से कहा कि वह अपने पति को थोड़ा सहज रहने के लिए समझाएं। अभिनेत्री के मुताबिक, सुनील दत्त अक्सर यह पूछते रहते थे कि कौन कहां जा रहा है और किसलिए जा रहा है। उन्हें उस समय यह व्यवहार बेहद सख्त लगता था, हालांकि बाद में उन्हें इसकी असली वजह समझ में आई।

अचानक सभी को वहां से हटाने लगे सुनील दत्त

वहीदा रहमान ने बताया कि एक दिन वह नरगिस दत्त और निरूपा रॉय के साथ नदी किनारे बैठकर भोजन कर रही थीं। तभी दूर से सुनील दत्त ने तेज आवाज में सभी को तुरंत वहां से उठने के लिए कहा। जब नरगिस ने कारण जानना चाहा तो उन्होंने बिना विस्तार से कुछ बताए सिर्फ वहां से हटने का आग्रह किया। उस समय किसी को समझ नहीं आया कि आखिर इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है और सभी चुपचाप वहां से लौट आए।

सुरक्षा को लेकर पहले ही हो गया था अंदेशा

कुछ देर बाद सुनील दत्त सुरक्षा अधिकारियों के साथ वापस पहुंचे। वहीदा रहमान ने बताया कि उस समय माहौल गंभीर दिखाई दे रहा था। कलाकारों को तुरंत जीप में बैठाया गया और उनके काफिले के आगे-पीछे सुरक्षा वाहन तथा हथियारबंद जवान मौजूद थे। अभिनेत्री के अनुसार, ऐसा लग रहा था कि इलाके में किसी संभावित खतरे की आशंका थी। सुनील दत्त ने स्थिति को समझते हुए बिना घबराहट फैलाए पहले पूरी टीम को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाना जरूरी समझा। बाद में सभी को एहसास हुआ कि उनकी सख्ती दरअसल सुरक्षा को लेकर सतर्कता का हिस्सा थी।

कई यादगार फिल्मों में साथ आई थी यह जोड़ी

वहीदा रहमान और सुनील दत्त ने हिंदी सिनेमा में कई फिल्मों में साथ काम किया। इनमें एक फूल चार कांटे, मेरी भाभी, मुझे जीने दो, दर्पण, रेशमा और शेरा तथा जिंदगी जिंदगी जैसी फिल्में शामिल हैं। पर्दे पर दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने हमेशा सराहा। सुनील दत्त का निधन 25 मई 2005 को हृदयाघात के कारण हुआ था, लेकिन उनकी फिल्मों और व्यक्तित्व से जुड़ी ऐसी यादें आज भी फिल्म प्रेमियों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं।

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