Political Reaction – राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर मायावती ने पारदर्शिता की उठाई मांग
Political Reaction – बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग से जुड़ी खबरों पर चिंता व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस विषय को राजनीतिक विवाद का रूप देना उचित नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर जारी किया बयान
मायावती ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच ‘X’ पर जारी अपने संदेश में कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी, हेराफेरी और गलत इस्तेमाल से जुड़ी मीडिया रिपोर्टें गंभीर हैं। उनके अनुसार, यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषियों को किसी भी तरह की राहत नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं।
राजनीतिक विवाद से बचने की अपील
बसपा प्रमुख ने अपने बयान में यह भी कहा कि इस संवेदनशील विषय का राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि धार्मिक संस्थानों से जुड़े मामलों का समाधान तथ्यों और निष्पक्ष जांच के आधार पर होना चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और मामले को अनावश्यक विवाद का रूप न देने की अपील की।
अन्य प्रमुख मंदिरों जैसी व्यवस्था का सुझाव
मायावती ने कहा कि भविष्य में भक्तों द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे को लेकर किसी प्रकार की शिकायत की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। इसके लिए देश के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों में अपनाई जा रही वित्तीय निगरानी और लेखा-जोखा प्रणाली जैसी व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा सकता है। उनका कहना है कि इससे श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा तथा प्रबंधन में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
शीघ्र समाधान की जताई उम्मीद
बसपा सुप्रीमो ने संबंधित अधिकारियों से इस पूरे मामले का जल्द और निष्पक्ष समाधान निकालने की अपेक्षा जताई। उन्होंने कहा कि समयबद्ध जांच और स्पष्ट कार्रवाई से लोगों के बीच उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा। साथ ही ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिससे भविष्य में धार्मिक संस्थानों में प्राप्त होने वाले चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर किसी प्रकार का संदेह उत्पन्न न हो।