WomenInPolitics – महिला नेतृत्व और उत्तराखंड की राजनीति पर सामने आई उक्रांद नेता की राय
WomenInPolitics – उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) की महिला केंद्रीय अध्यक्ष और सेवानिवृत्त मेजर संतोष भंडारी ने कहा है कि महिलाओं के लिए राजनीति में आगे बढ़ना आसान नहीं है। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में काम करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को कई तरह की चुनौतियों, आलोचनाओं और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। उन्होंने यह बात एक साक्षात्कार के दौरान साझा की।

सेवानिवृत्ति के बाद राजनीति में रखा कदम
मेजर संतोष भंडारी ने बताया कि उनका राजनीति से पहले कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। वर्ष 2021 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय भूमिका निभाने का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड क्रांति दल ने उनके अनुभव और कार्यशैली पर भरोसा जताते हुए उन्हें महिला केंद्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी, जिसके लिए वह संगठन के प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
राज्य आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का किया उल्लेख
उन्होंने उत्तराखंड राज्य आंदोलन में महिलाओं के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, अलग राज्य की मांग को लेकर चले लंबे आंदोलन में महिलाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई और अनेक लोगों ने अपने प्राणों का बलिदान भी दिया। उनका कहना था कि राज्य गठन के बाद राजनीतिक परिदृश्य में राष्ट्रीय दल अधिक प्रभावशाली हो गए, जबकि आंदोलन से जुड़े क्षेत्रीय दल अपेक्षित राजनीतिक सफलता हासिल नहीं कर सके।
क्षेत्रीय दलों की चुनौतियों पर रखी बात
उक्रांद नेता ने कहा कि राज्य आंदोलन से जुड़े कई वरिष्ठ कार्यकर्ता सामाजिक संघर्ष में सक्रिय थे, लेकिन व्यावहारिक राजनीति का अनुभव सीमित होने के कारण वे चुनावी राजनीति में अपेक्षित बढ़त नहीं बना पाए। उन्होंने आरोप लगाया कि समय के साथ राष्ट्रीय दलों ने राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ बनाई। हालांकि, यह उनके व्यक्तिगत और राजनीतिक विचार हैं।
पर्यावरण और संगठन विस्तार पर भी दिया बयान
मेजर संतोष भंडारी ने दावा किया कि उक्रांद से बड़ी संख्या में महिलाएं और पूर्व सैनिक जुड़ रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है। उनके अनुसार, अनियंत्रित विकास और बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई जैसी गतिविधियों पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना भविष्य की बड़ी चुनौती होगी।