Temple Trust – राम मंदिर निर्माण से जुड़े आरोपों पर नई बहस शुरू
Temple Trust – अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर से जुड़े निर्माण कार्यों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। इस बार मामला मंदिर परिसर के निर्माण कार्यों की निगरानी से जुड़े रहे सेवानिवृत्त इंजीनियर दीनानाथ वर्मा के बयानों के बाद सामने आया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक साक्षात्कार में वर्मा ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र को लेकर कुछ गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों का संबंधित पक्ष की ओर से खंडन भी किया गया है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मंदिर निर्माण और उससे जुड़े प्रशासनिक पहलुओं को लेकर पहले भी विभिन्न स्तरों पर चर्चाएं होती रही हैं। फिलहाल मामला आरोपों और प्रतिवादों तक सीमित है तथा किसी आधिकारिक जांच में इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है।
पूर्व इंजीनियर ने लगाए वित्तीय अनियमितता के आरोप
दीनानाथ वर्मा ने अपने साक्षात्कार में दावा किया कि मंदिर परिसर से संबंधित एक कार्यालय भवन के निर्माण के दौरान एल्युमिनियम कार्य से जुड़े ठेके में कथित तौर पर अतिरिक्त राशि जोड़े जाने का दबाव बनाया गया था। उनका आरोप है कि कार्य से जुड़े बिल की राशि वास्तविक लागत से काफी अधिक तैयार कराने का प्रयास किया गया।
वर्मा का कहना है कि उन्होंने इस प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी और मामले की जानकारी संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों तक पहुंचाई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास बातचीत से जुड़े कुछ रिकॉर्ड मौजूद थे, जिन्हें उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सुनाया था।
ट्रस्ट पदाधिकारियों को दी गई थी जानकारी
साक्षात्कार में वर्मा ने कहा कि उन्होंने अपनी आपत्तियों और चिंताओं को ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के समक्ष रखा था। उनका आरोप है कि शिकायत करने के बाद उन्हें परियोजना से अलग कर दिया गया।
हालांकि, इन दावों को लेकर ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है। ऐसे में आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल संभव नहीं है।
निर्माण कार्य से जुड़े व्यक्ति ने किया खंडन
मामले में उस निर्माण कार्य से जुड़े बताए जा रहे रवि गुप्ता ने सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए दीनानाथ वर्मा के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि कार्य से संबंधित जो बातें सार्वजनिक की जा रही हैं, वे वास्तविक परिस्थितियों से मेल नहीं खातीं।
रवि गुप्ता के अनुसार, उन्हें ट्रस्ट कार्यालय से जुड़े निर्माण कार्य के लिए मूल्य प्रस्ताव देने को कहा गया था। प्रस्ताव जमा करने के बाद कुछ समय तक कोई सूचना नहीं मिली और बाद में उन्हें पता चला कि कार्य किसी अन्य माध्यम से कराया जा रहा है।
कार्य रुकने के बाद दोबारा मिला जिम्मा
रवि गुप्ता ने बताया कि बाद में संबंधित कार्य बीच में रुक गया था, जिसके बाद उन्हें फिर से बुलाया गया। उनके अनुसार, दोबारा माप-जोख और तकनीकी आकलन के बाद नया प्रस्ताव तैयार किया गया और फिर निर्माण कार्य पूरा कराया गया।
उन्होंने कहा कि पूरे कार्यकाल के दौरान उनसे कभी किसी प्रकार की कमीशन या अतिरिक्त भुगतान की मांग नहीं की गई। रवि गुप्ता ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि किसी के पास आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
जांच होने पर ही स्पष्ट होंगे तथ्य
मौजूदा समय में यह मामला सार्वजनिक आरोपों और उनके जवाब तक सीमित है। दोनों पक्ष अपने-अपने दावे पेश कर रहे हैं, लेकिन किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा इन आरोपों की पुष्टि नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संबंधित प्राधिकरण या जांच एजेंसी इस मामले की औपचारिक जांच करती है, तभी आरोपों की सत्यता या असत्यता स्पष्ट रूप से सामने आ सकेगी। तब तक उपलब्ध जानकारी केवल संबंधित पक्षों के बयानों पर आधारित मानी जाएगी।